खड्डा। क्षेत्र के माघी-भगवानपुर के माघी मुस्तकिल मौजा में गंडक नदी के कटान से केले की खेती करने वाले किसानों की मेहनत पानी में जा रही है। नदी की धारा खेतों की ओर बढ़ते हुए केले की फसल को काट रही है। आंखों के सामने लहलहाती फसल को नदी में समाते देख किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों ने केले की खेती में काफी पूंजी लगाई है और कई किसानों ने इसके लिए कर्ज तक लिया है। किसान संजय प्रजापति की 3 बीघा, दशरथ और राजेश निषाद की 2-2 बीघा केले की फसल कटान की जद में है। किसानों के मुताबिक, महज 20 से 25 दिन में उपज बाजार में जाने वाली थी लेकिन नदी की धार खेत और फसल दोनों को निगलने लगी है। ऐसे में कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष भी नदी ने बड़े पैमाने पर खेतों और फसलों को नुकसान पहुंचाया था। इस बार भी कटान रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिख रही है। बीरभार ठोकर के आगे छितौनी तटबंध से करीब 400 मीटर नदी की ओर के खेत कटान की जद में हैं। यह जमीन आसपास के गांवों के किसानों की खेती का प्रमुख आधार है।
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फसल के साथ टूट रही उम्मीद
-ग्रामीण रवि प्रजापति, विजयी, भोरिक, राम प्रवेश, विनोद, विद्यालाल और रमेश आदि का कहना है कि केले के साथ अन्य फसलों से भी अच्छी आमदनी की उम्मीद थी। फसल तैयार होने के समय नदी के रुख ने उनकी पूरी मेहनत पानी में जाती दिख रही है। किसानों का कहना है कि नुकसान के बाद भी अब तक राहत या मुआवजे की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं हुई है। किसानों ने प्रशासन से तत्काल कटान की स्थिति का निरीक्षण कर उसे रोकने के उपाय करने तथा क्षति का आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। इस संबंध में बाढ़ खंड के एसडीओ मनोरंजन कुमार ने बताया कि इस स्थान पर कटान रोकने के लिए फिलहाल कोई योजना नहीं बनी है और न ही इस संबंध में कोई निर्देश मिला है।