पडरौना। जिले में विलय से खाली हुए विद्यालय भवनों का उपयोग करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उसमें बाल वाटिका संचालित करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सौंपने का कार्य शुरू हो गया है। विलय हुए 21 परिषदीय विद्यालयों से नजदीक के विद्यालयों की दूरी 500 मीटर से अधिक है। इसलिए उन विद्यालयों को विलय की सूची से बाहर कर दिया गया है।
जिले में 2464 परिषदीय विद्यालय संचालित होते हैं। शासन के निर्देश पर 50 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को पास के विद्यालय में विलय के लिए जिले के 117 विद्यालयों को चिन्हित किया गया था। इसमें से विलय हुए 21 विद्यालयों से उनके नजदीक के विद्यालयों की दूरी 500 मीटर होने से उनके विलय पर रोक लगाते हुए उन विद्यालयों को पहले की तरह ही संचालित किया जाएगा, जबकि 64 विद्यालयों में पहले से ही को लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होते थे, इस लिए इन विद्यालयों में आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित कर दिया जाएगा। ऐसे में रिक्त पड़े 32 विद्यालयों में बाल वाटिका संचालित होगा। बीएसए डॉ. रामजियावन मौर्या ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बाल वाटिका बच्चों को भाषा एवं गणित में बुनियादी शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। कार्यक्रम एक खेल-आधारित और गतिविधि-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से नौनिहालों का शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास पोषित करता है। इससे बाल वाटिका में पढ़ने वाले बच्चे औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार हो सकेंगे। बाल वाटिका का मूल उद्देश्य बच्चों को एक समृद्ध व पोषणकारी वातावरण प्रदान करना है।