संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। खाने-पीने की चीजों में हो रही मिलावट से मिठाइयों की तरफ से मसाले भी अछूते नहीं हैं। सब्जियों को स्वादिष्ट बनाने के लिए ब्रांडेड से लेकर खुदरा बिकने वाले मसालों में धड़ल्ले से मिलावट हो रही है। थोड़े से मुनाफे के चक्कर में दुकानदार लोगों को बीमारियां परोस रहे हैं।
शहर की थोक और खुदरा मंडियों में हल्दी, धनिया, जीरा से लेकर काली मिर्च तक में घालमेल किया जा रहा है। पिछले माह खाद्य विभाग ने संदेह के आधार पर मसाले के दो नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे। उसमें से कसौटी पर एकत्र मसाले का एक भी नमूना खरा नहीं उतरा। दरअसल ज्यादातर मसाले दूसरे प्रदेश से गोरखपुर मंडी के जरिये कुशीनगर पहुंचते हैं।
शहर के थोक व्यापारी गोरखपुर से मसाला खरीदकर फुटकर विक्रेताओं को बेचते हैं। व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह गोरखपुर की मंडी से मसाले खरीदते हैं, वैसे ही वे लोग फुटकर विक्रेताओं को बेच देते हैं।
स्थानीय स्तर पर मिलावट नहीं होती है। यदि उनकी बात मान लें तो आखिर लोगों के घर पहुंच रहे मिलावटी मसाले कहां से आते हैं, यह जांच का विषय है। सूत्रों की मानें तो लोगों तक पहुंचने से पहले मसालों में मिलावटी का खेल हो जाता है।
बाजार से साबुत और पिसे मसालों की आपूर्ति छोटे दुकानों पर की जाती है। यहीं पर कुछ दुकानदार मिलावटखोरी का धंधा करते हैं। मसालों में तरह-तरह के पाउडर मिलाकर उनका वजन बढ़ाया जाता है। बाद में सादी पैकिंग में छोटे दुकानदारों को आपूर्ति किया जाता है, लेकिन मुनाफे के इस खेल में लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जाता है। यहां ब्रांडेड कंपनियों के मसाले भी बड़ी मात्रा में आते हैं।
स्थानीय दुकानदार इनमें मिलावट तो नहीं कर पाते, लेकिन एक्सपायरी डेट के नजदीक पहुंचे मसाले को खपाने के चक्कर में सस्ती दर पर फुटकर विक्रेताओं को बेच रहे हैं। इस तरह के मसाले अधिकतर मोहल्लों और गांव की छोटी दुकानों पर खपाए जाते हैं।
वहां खरीदारी करने आए लोग जल्दी मसाला खरीदने के चक्कर में ठगे जाते हैं।
ऐसे होता है मिलावट का खेल : मसलाों में मिलावट का खेल बड़ी सावधानी से होता है। साबुत धनिया का वजन बढ़ाने के लिए धनिया के बाेरे को रात भर एक भट्टी में रखा जाता है। इसमें खास तरह की गैस प्रवाहित की जाती है।
इससे रात भर में एक बोरे का वजन 15 किलो तक बढ़ जाता है। बाद में यही धनिया बाजार में बेची जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक साबित होती है। यह खेल बड़े पैमाने पर किया जाता है। पिसी धनिया में चावल का कन मिलाकर मुनाफा कमाया जाता है। साबुत हल्दी को चमकदार बनाने के लिए रंग का प्रयोग किया जाता है, जबकि पिसी हल्दी में बेसन या चावल का आटा मिलाया जाता था। मिर्च का पाउडर बनाने में खराब मिर्च का इस्तेमाल अधिक किया जाता है।