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समापन पर दया, करुणा और मैत्री का संदेश दिया

Wed, 25 Nov 2015 11:45 PM IST
अमर उजाला/कुशीनगर
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कसया। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थली कुशीनगर में आयोजित तीन दिवसीय बौद्ध महोत्सव के समापन पर मुख्य अतिथि केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. देवराज सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति का संवर्द्धन जरूरी है। जिस गति से हमारी संस्कृति का ह्रास हो रहा है, वह पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है।
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मौजूदा समय में मानवीय मूल्यों को पुनर्स्थापित करना आवश्यक है। ऐसे में भगवान बुद्ध के उपदेशों की प्रासंगिकता बढ़ गई है। कुल सचिव ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है। यहां 20 किलोमीटर पर बोली, 50 किलोमीटर पर आचार-विचार, 100 किलोमीटर पर वेशभूषा, 200 किलोमीटर पर भाषा और इससे अधिक की दूरी पर परंपराएं बदल जाती हैं। देश के भीतर जो हालात हैं, उनसे संस्कृति का क्षरण हो रहा है।
 इसे बचाना होगा ताकि भावी पीढ़ी को अपने अतीत की जानकारी हो सके। बुधवार को महोत्सव के अंतिम दिन के कार्यक्रम की शुरुआत सुबह लगभग 11 बजे चेटिंग से की गई। इसके बाद लामाओं की ओर से वाद्ययंत्रों की संगत के साथ सूत्र पाठ किया गया। अगली कड़ी में देछेन छोस्खोर लिंड, कार्युद विहार कलेमिंटन, देहरादून के लामाओं की ओर से बौद्ध तांत्रिक नृत्य सावा छाम की प्रस्तुति की गई।
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महापरिनिर्वाण मंदिर में लगाई गई प्रदर्शनी में बौद्ध पद्धति में मक्खन से बनाई जाने वाली पूजन सामग्रियों, रजो मंडल का निर्माण, बौद्ध मंत्रों का पाठ किया गया। भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित इस महोत्सव में दया, करुणा और मैत्री का संदेश दिया गया। साथ ही भगवान बुद्ध के उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का लोगों ने संकल्प लिया। संचालन और व्याख्या डॉ. बनारसी लाल ने किया।
इस मौके पर महोत्सव के नोडल अफसर डॉ. छेरिंग डकपा, स्टेट अफसर डॉ. फुनचोंग खोमचे, डॉ. लोअंग तेनझिंग, डॉ. दोर्जे डमडुल, डॉ. लोसंग दोर्जे, वरिष्ठ पुरातत्व संरक्षण अधिकारी पंकज तिवारी, पथिक निवास के प्रबंधक राजेश मणि त्रिपाठी और राजेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।
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