पडरौना। कार्तिक पूर्णिमा पर बांसी नदी सहित बड़ी गंडक और छोटी गंडक नदी के विभिन्न घाटाें पर रात में 12 बजे से ही श्रद्धालुआें ने डुबकी लगाई। दान-दक्षिण देकर श्रद्धालुआें ने मंदिरों में पूजा कर सुख समृद्धि की कामना की। नदियों के किनारे घाटों पर मेला लगा रहा।
मेले में आए श्रद्धालुआें के मनोरंजन के लिए प्रदर्शनी में झूले, मौत का कुंआ, जादू आदि के कार्यक्रम दिखाए गए। मेला शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए पुलिस के जवान तैनात रहे। पडरौना से करीब दस किलोमीटर उत्तर बांसी घाट और रामघाट पर स्नान-दान के लिए इस वर्ष भी उत्तम व्यवस्था की गई थी। युवा सेवा समिति बांसी धाम के लोगों ने बांसी नदी का किनारा साफ करा रखा था। नदी के किनारे पथ प्रकाश, लाउडस्पीकर, श्रद्धालुओं के ठहरने सहित कई इंतजाम किए गए थे।
नदी के किनारे इस वर्ष भी मेले का आयोजन हुआ था, जिसमें दूर-दूर से दुकानदार मिठाई, कपड़े, आभूषण, खिलौने, पूजा की सामग्रियाें सहित विभिन्न प्रकार की दुकानें सजाए बैठे थे। इसके अलावा मेले में आए बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के लिए झूला, मौत का कुंआ, जादू आदि से जुड़ी प्रदर्शनियां लगाई गई थीं।
इस मेले में कुशीनगर जनपद सहित महराजगंज, देवरिया, गोरखपुर, बिहार के गोपालगंज, बगहां, नरकटियागंज, सीवान सहित दूर-दूर से श्रद्धालु आए थे। रात में 12 बजे के बाद से ही श्रद्धालुओं ने बांसी नदी में डुबकी लगानी शुरू कर दी। घाट पर मौजूद पुरोहिताें ने श्रद्धालुओं से गोदान कराया। रगड़गंज और हेतिमपुर में भी छोटी गंडक के किनारे सैकड़ों श्रद्धालुआें ने डुबकी लगाई।
सेवरही एवं तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार शिवाघाट और नारायणी नदी के पिपराघाट में भी काफी संख्या में श्रद्धालुआें ने डुबकी लगाई। गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार करने की कामना से गोदान किया। खाद्य सामग्रियों के साथ गर्म कपडे़ भी खरीदे। रात में नदी के किनारे कोसी पूजा के साथ आरती और भजन कीर्तन किए। नदी किनारे कुछ संगठनों ने लंगर और भंडारे का भी आयोजन किया।
मेले में तमकुहीरोड, तिवारीपट्टी, राजपुर, मिश्रौली, तमकुहीराज, सलेमगढ़, तरयासुजान, हरिहरपुर, बभनौली सहित बिहार के मलाही टोला, ठकरहां, जलालपुर, कुचायकोट, सासामूसा व अन्य जगहों से श्रद्धालु आए थे। तमकुहीरोड स्टेशन पर भीड़ तो थी ही, ट्रेनों में भी यात्री भरे हुए थे। सीवान के रामअवतार गुप्ता, मनीषा, उर्मिला, रीना देवी ट्रेन छूट जाने से परेशान रहीं। ऐसे त्योहारों पर ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ाए जाने से लोग परेशान थे।