पडरौना। शहर के रामकोला रोड स्थित रोडवेज बस स्टेशन से शाम सात बजे के बाद रोडवेज बसों का पहिया थम जाता है। इसके चलते पडरौना से कसया, देवरिया और गोरखपुर जाने वालों लोगों को ई-रिक्शा, टैंपाे या अन्य डग्गामार वाहनों से यात्रा करना पड़ता है, जिससे लोगों को परेशानी होने के अलावा उनका आर्थिक खर्च भी बढ़ जाता है।
पडरौना डिपो की तरफ से निगम की 39 और अनुबंधित की 21 बसों का संचालन होता है। इसके अलावा गोरखपुर, देवरिया, लखनऊ, हमीरपुर, उन्नाव, कानपुर डिपो की बसों का संचालन होता है। इन बसों से हर दिन दस हजार से अधिक यात्री यात्रा करते हैं। पडरौना जिला मुख्यालय होने के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार का निकटवर्ती बड़ा शहर है। जिले के लोगों के अलावा बिहार के सीमावर्ती गांव दिल्ली, मुंबई, गुजरात समेत अन्य शहरों में रात में गोरखपुर से मिलने वाली ट्रेन से यात्रा करने के लिए घर से शाम को निकलते हैं, लेकिन जब वे पडरौना बस स्टेशन पर पहुंचते हैं तो शाम सात सात बजे के बाद उन्हें रोडवेज की बसें नहीं मिलती है। इससे उन्हें परेशान होना पड़ता है। पडरौना से कसया तक ई-रिक्शा या टैंपो से चले जाते हैं, लेकिन गोरखपुर जाने के लिए बस स्टेशन पर खड़े यात्रियों को यदि कभी गोरखपुर अथवा अन्य डिपो की बसों मिल गईं तो ठीक, नहीं तो लोगों को टैंपो के साथ डग्गामार वाहनों से यात्रा करना पड़ता है। इससे उन्हें यात्रा के दौरान परेशानी होने के साथ किराए के नाम पर अधिक खर्च चुकाना पड़ता है। रविवार को बस स्टेशन पर बस का इंतजार कर रहे बिहार के मरचहवा निवासी पप्पू राजभर, सुरेंद्र कुमार, हरेंद्र प्रसाद, सत्य प्रकाश यादव आदि ने बताया कि रात 11 बजे गोरखपुर से गुजरात के लिए ट्रेन है। सुबह से वहां जाकर भटकना न पड़े इसके लिए घर से शाम को निकला हूं। बस पकड़ने के लिए बीते करीब एक घंटे से बस स्टेशन पर खड़ा हूं, लेकिन कोई बस अब तक नहीं आई। थोड़ा और इंतजार करूंगा। यदि बस नहीं मिली तो प्राइवेट बस से मजबूरी में गोरखपुर जाउंगा। इस संबंध में पडरौना डिपो के एआरएम जयप्रकाश प्रधान ने बताया कि बस स्टेशन से बसों की कमी नहीं है। पडरौना डिपो के अलावा अन्य डिपो की कई बसें हैं। थोड़ा इंतजार करने के बाद बस मिल जाती है। कभी-कभी बस नहीं मिलने की दिक्कत हो सकती है। संबंधित चालक और परिचालकों को रात नौ बजे तक बसों का संचालन करने के लिए निर्देश दिया गया है।