कुशीनगर। बिहार बार्डर के गांवों में ठौर लेने वाले पशु तस्करों पर जहां शिकंजा कसा जाएगा। यहां शरण देने वाले बेनकाब होंगे। बिहार को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग के अलावा पगडंडियों पर जहां पुलिस ने बैरियर लगाकर घेराबंदी किया है, वहीं अब गांवों में आकर छिपने वाले पशु तस्कर पुलिस की नजरों से अब नहीं बच पाएंगे।
गांव के चौकीदारों को इसके लिए सक्रिय किया गया है। थानाध्यक्ष सीधे चौकीदारों के संपर्क में रहेंगे। चौकीदारों की रिपोर्टिंग पर गांव में आने-जाने वाले संदिग्धों की जांच बीट सिपाही और हलका दरोगा करेंगे। अपराधी प्रवृति के लोगों तथा तस्करों की पुष्टि होने पर शरणदाताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी।
कुशीनगर के रास्ते बिहार में होने वाली पशु तस्करी पर रोक लगाने के लिए पुलिस हर हथकंडा अपना रही है। एसपी केशव कुमार की समीक्षा में पता चला है कि गैर जिलों से आने वाले पशु तस्कर बिहार बार्डर या हाईवे से सटे गांवों में शरण लेते हैं।
शरण देने वाले अपने रिश्तेदार या करीबी बनाकर उनको घर पर रखते हैं और पुलिस की आंखों में धूल झोंकर पशु तस्करी के खेल को अंजाम देते हैं।
पुलिस की सूचना की कड़ी गांवों के चौकीदार हैं, लेकिन चौकीदारों को महत्व नहीं मिलने के कारण वे गांवों की खबर से बेखबर रहते हैं। इसलिए पुलिस का सूचना तंत्र कमजोर हो गया है, जिसका लाभ अपराधी, तस्करों को मिल रहा है। एसपी ने सभी थानाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि चौकीदारों के संपर्क में रहें।
चौकीदारों को गांव में आने जाने वाले संदिग्ध लोगों पर नजर रखने, जिनके यहां वे रुक रहे हैं, उनका मोबाइल नंबर और नाम रजिस्टर में दर्ज करने,हीला हवाली करने पर संबंधित थानाध्यक्ष को सूचना देने का निर्देश दिया गया है। चौकीदारों को रजिस्टर मिलेगा और बीट सिपाही दिन में एक बार चौकीदारों से मिलेंगे। इसके अलावा सुबह और शाम को थानाध्यक्ष भी गांवों की गतिविधियों के बारे में चौकीदारों से जानकारी लेंगे।
इससे चौकीदारों का जहां कद बढ़ेगा, वहीं गांवों में होने वाली अपराधिक गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक आसानी से पहुंचेगी।
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