लखनऊ में सड़क जाम और धरना प्रदर्शन के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने वापस आकर पुन: कलमबंद हड़ताल शुरू कर दिया है। इन महिलाओं ने धरना-प्रदर्शन के दौरान प्रदेश सरकार पर लाठीचार्ज कराने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इनका कहना था कि लाठीचार्ज की वजह से ही घायल बाराबंकी की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अलका मौर्या की मौत हो गई। इन लोगों ने पीड़ित परिवार के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए सरकारी मदद दिलाने की मांग की।
उत्तर प्रदेश आंगनबाड़ी संघ से जुड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बृहस्पतिवार को सीडीपीओ कार्यालय पर एकत्र हुईं और धरना पर बैठ गईं। जिलाध्यक्ष कौशिल्या सिंह ने कहा कि प्रदेश भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं लखनऊ में सड़क जाम कर धरना दे रही थीं, तभी प्रदेश सरकार के इशारे पर लाठीचार्ज किया गया। इससे कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं घायल हो गईं। उनका कहना था कि लाठीचार्ज में घायल बाराबंकी की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अलका मौर्या की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि अलका मौर्या के दोनों बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च, मृतक आश्रित को सरकारी नौकरी एवं पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये आर्थिक मदद दिलाया जाए, अन्यथा आंदोलन किया जाएगा। इन लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर अपनी तरफ से शोक संवेदना व्यक्त की।
इस दौरान नीलम कुशवाहा, अनुराधा श्रीवास्तव, अनीता पांडेय, विंदा यादव, उषा पांडेय, इंदू देवी, लालमती देवी, गिरजा देवी, विमल देवी, कमलावती देवी, गीता देवी, दुर्गावती देवी, उर्मिला चौरसिया, आरती राव, मालती देवी, मधु श्रीवास्तव आदि मौजूद थीं।
जटहां बाजार प्रतिनिधि के अनुसार विशुनपुरा क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने सीडीपीओ कार्यालय के परिसर में बैठक की। इन लोगों ने भी लखनऊ में धरना प्रदर्शन के दौरान बाराबंकी की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मृत्यु पर दो मिनट का मौन रखकर शोक संवेदना व्यक्त की। इस दौरान बीना मिश्रा, बच्ची पाल, विमला जायसवाल, तारा शर्मा, कुसुम देवी, सीमा शर्मा, सरिता देवी आदि मौजूद थीं।
बृहस्पतिवार को हाटा ब्लाक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सुबह सीडीपीओ कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इन लोगों ने सरकार की तरफ से बढ़ाए गए मानदेय को अस्वीकार कर दिया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ब्लाक अध्यक्ष शालिनी बरनवाल ने कहा कि सरकार ने जो आठ सौ रुपये मानदेय बढ़ाया है, वह बहुत कम है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य के बराबर मानदेय देने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। महिलाओं का कहना था कि जब तक मानदेय सात हजार रुपये नहीं दिया जाता है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस दौरान फातिमा बेगम, सिंधु, मीरा, नीलम, कमलावती, मालती श्रीवास्तव, आसिया खातून, गुड़िया, मालती, जया सहित तमाम कार्यकर्ता व सहायिकाएं मौजूद रहीं।