कार्यकर्ता और सहायिका मनमाने ढंग से कर रहीं काम, मन हुआ तो पहुंचीं वरना बंद पड़ा रह जाता है केंद्र
आदित्य कुमार शाही
पडरौना। बच्चों को कुपोषण से बचाने, गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण संबंधी सेवाएं उपलब्ध के लिए संचालित अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। कार्यकर्ता और सहायिका अपनी सहूलियत के हिसाब से केंद्र चला रही हैं।
मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने चार ब्लॉकों के छह आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल की। इसमें अव्यवस्था और मनमानी की तस्दीक हुई। कहीं ताला लटका मिला तो कहीं कार्यकर्ता और सहायिकाएं नदारद रहीं। कई केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति कम मिली। सुबह 10:10 बजे सुकरौली ब्लॉक का गिदहां धनहा आंगनबाड़ी केंद्र खुला हुआ था। केंद्र पर पंजीकृत कुल 29 बच्चों में सिर्फ एक बच्चा वहां मौजूद मिला। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गीता शर्मा और सहायिका राधिका देवी ने बताया कि बच्चे कम ही आते हैं।
सुबह 10:35 बजे सुकरौली ब्लॉक के आंगनबाड़ी केंद्र नाऊमुंडा-धरमौली पर सिर्फ सहायिका मिथिलेश मौजूद थीं। यहां तैनात तीनों कार्यकर्ता प्रेमलता, तारा देवी और अनिता देवी और दो अन्य सहायिकाएं गीता और रिंकू गैरहाजिर थीं। पंजीकृत 36 बच्चों की जगह सिर्फ एक बच्चा ही केंद्र पर मौजूद मिला। सुबह 10:50 बजे हाटा ब्लॉक के आंगनबाड़ी केंद्र बल्डीहा में पंजीकृत 35 में सिर्फ से 10 बच्चे ही मौजूद मिले। आशा कार्यकर्ता बिंदु देवी ने बताया कि दो केंद्रों की देखरेख की जिम्मेदारी उनके पास है। हफ्ते में सोमवार, मंगलवार व बुधवार को बल्डीहा और बृहस्पतिवार, शुक्रवार व शनिवार को हरपुर केंद्र पर ड्यूटी करती हैं।
सुबह 11:25 बजे आंगनबाड़ी केंद्र सुकरौली ब्लॉक के चक नरायनपुर में सहायिका गैरहाजिर रहीं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मीना देवी अकेले कमरे में बैठी बच्चों को पढ़ाती मिलीं। उन्होंने बताया कि केंद्र पर कुल 26 बच्चे पंजीकृत हैं, इनमें से रोजाना 14 से 15 बच्चे ही आते हैं। केंद्र पर इस समय सात गर्भवती व पांच धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं।
घर आ गए मेहमान, नहीं खुला आंगनबाड़ी केंद्र
सोमवार की सुबह 10:00 बजे सुकरौली ब्लॉक के पिपरा लालमन में आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिला। इस केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता साधना श्रीवास्तव व सहायिका आशा देवी की तैनाती है। केंद्र पर तैनात कार्यकर्ता साधना ने बताया कि घर पर कुछ मेहमान आ गए थे इसलिए केंद्र खुल नहीं पाया। दावा किया कि रोजाना केंद्र समय से खुलता है। हालांकि पंजीकृत 28 बच्चों में से 14-15 ही आते हैं। सहायिका की तबीयत खराब हो गई थी, इसलिए वह भी केंद्र पर नहीं पहुंच पाई।
घर में कोई बीमार इसलिए नहीं आईं केंद्र पर
दोपहर बाद 12:05 बजे कसया ब्लॉक के आंगनबाड़ी केंद्र पकड़िहवा भैंसहा हेतिमपुर में पंजीकृत 48 में से सिर्फ दो बच्चे ही मौजूद मिले। कार्यकर्ता प्रेमलता सिंह ने बताया कि केंद्र पर तैनात सहायिका लाल मुन्नी देवी जरूरी काम से चली गई हैं। कार्यकर्ता अंजू सिंह के परिवार में किसी की तबीयत खराब है, इसलिए वह नहीं आई हैं। बच्चों के वजन, माप आदि के लिए मिले सभी उपकरण खराब हो चुके हैं।
14 ब्लॉकों और शहरी क्षेत्र में 4,134 आंगनबाड़ी केंद्र
जिले के 14 ब्लॉकों और शहरी क्षेत्र में 4,134 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर कुल 3,48,034 लाभार्थी पंजीकृत हैं। इनमें 12,922 धात्री और 16,855 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा 6 माह तक के 13,182 बच्चे, 6 माह से तीन वर्ष तक के 1,51,155 और तीन वर्ष से छह वर्ष तक के 1,53,890 बच्चे शामिल हैं। सबसे अधिक आंगनबाड़ी केंद्र 453 पडरौना ब्लॉक और सबसे कम 125 पडरौना शहर में हैं। स्तनपान कराने वाली महिलाओं की संख्या भी पडरौना में सबसे अधिक 1283 दर्ज है। यहीं सबसे अधिक 1802 गर्भवती महिलाएं भी पंजीकृत हैं।
वर्जन
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की अनुपस्थिति गंभीर लापरवाही है। सीडीपीओ और सुपरवाइजर को मौके की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट के आधार पर अनुपस्थित कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- एके दूबे, जिला कार्यक्रम अधिकारी, कुशीनगर