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Kushinagar News: कृषि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाला संस्थान नहीं, किसानों की समस्याओं का समाधान भी करेगा

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महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की रूपरेखा तैयार, पहले 100 दिनों में बनेगी कार्ययोजना
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‘एक जिला–एक कृषि समाधान’ पर रहेगा जोर, पूर्वांचल को मिलेगी अलग पहचान
नीलांबुज मिश्रा
कुशीनगर। महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को सिर्फ डिग्री बांटने वाला संस्थान नहीं बल्कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने वाला राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट केंद्र बनाने की परिकल्पना है। इसके लिए आगामी तीन वर्षों में गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा, क्षेत्रीय जरूरतों पर आधारित शोध, आधुनिक तकनीक और किसान-केंद्रित योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पहले कुलपति डॉ. रामजी सिंह ने संवाद न्यूज एजेंसी से विशेष बातचीत में विकास की रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि शोध का उद्देश्य केवल शोधपत्र प्रकाशित करना नहीं बल्कि खेतों में किसानों की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकालना होना चाहिए। कृषि विवि पूर्वांचल में अलग छाप छोड़ेगा।
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डॉ. रामजी सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय की सफलता का वास्तविक पैमाना किसानों की उत्पादकता, आय और जीवन स्तर में सुधार होगा। उनकी परिकल्पना है कि “ज्ञान से विज्ञान, विज्ञान से किसान और किसान से समृद्धि” का मंत्र विश्वविद्यालय की कार्य संस्कृति बने।

सवाल : विश्वविद्यालय को अगले तीन वर्षों में किस रूप में विकसित करना चाहते हैं।

जवाब : हमारा लक्ष्य इसे पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और किसान समृद्धि का अग्रणी केंद्र बनाना है। इसके लिए मजबूत प्रशासन, आधुनिक प्रयोगशालाएं, योग्य शिक्षक और विद्यार्थियों के कौशल विकास पर जोर रहेगा। विश्वविद्यालय की स्वतंत्र पहचान और आधारभूत ढांचे को भी मजबूत किया जाएगा।

सवाल : किसानों को विश्वविद्यालय से सीधे क्या लाभ मिलेगा।

जवाब : ‘एक जिला–एक कृषि समाधान’ की अवधारणा पर काम होगा। धान, गन्ना, केला, लीची और सब्जियों से जुड़ी स्थानीय समस्याओं पर शोध किया जाएगा। किसान सेवा केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों और प्रदर्शन प्रक्षेत्रों के जरिये मृदा परीक्षण, कीट-रोग निदान, उन्नत बीज और मौसम आधारित सलाह किसानों तक पहुंचाने का प्रयास होगा।

सवाल : आधुनिक कृषि तकनीक और रोजगार के लिए क्या योजना है।

जवाब : ड्रोन, सेंसर, स्मार्ट सिंचाई और जलवायु-अनुकूल खेती को प्रायोगिक फार्म से जोड़ा जाएगा। कृषि नवाचार हब के माध्यम से युवाओं को स्टार्टअप, उद्यमिता, पेटेंट और उद्योगों से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है।
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सवाल : शुरुआती 100 दिनों में क्या प्राथमिकताएं होंगी।

जवाब : अकादमिक, वित्तीय, प्रशासनिक और आधारभूत स्थिति का आकलन कर तीन वर्षीय रणनीतिक तथा दस वर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना बनाई जाएगी। शोध कार्यक्रमों, डिजिटल व्यवस्था और स्मार्ट फार्म मिशन की शुरुआत के साथ कार्यों की निगरानी के लिए प्रदर्शन डैशबोर्ड विकसित करने पर जोर रहेगा।
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