नाहर छपरा गांव निवासी मृतक अमरजीत के गमगीन परिजन ।स्रोत-सोशल मीडिया
मंसाछापर। अगर लोग भागने के बजाय हाथ बढ़ा देते, तो मेरा लाल आज जिंदा होता। यह दर्द उस मां मर्ची देवी के हैं, जिसने सड़क हादसे में अपने जवान बेटे अमरजीत को खो दिया। मिट्टी लदे ट्रैक्टर-ट्राली के नीचे दबकर हुई चालक अमरजीत की मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि वहां मौजूद लोगों के मानवीय संवेदनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की मां मर्ची देवी का आरोप है कि जब बेटा अमरजीत ट्रैक्टर-ट्राॅली के नीचे दबा था। मौजूद लोग भागने की जगह बचाए होते तो उसकी जान बच गई होती।
मामले में परिजनों ने घटना के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को जांच कर कार्रवाई किए जाने के पुलिस के आश्वासन के बाद अमरजीत कर अंतिम संस्कार किया था।
बता दें कि पडरौना कोतवाली क्षेत्र में पडरौना-मंसाछापर मार्ग स्थित कुरमौल उर्फ सोहनपुर के पास बीते मंगलवार देर रात मिट्टी लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली में नीचे दबकर अमरजीत की मौत हो गई थी। इसमें बुधवार शाम पोस्टमार्टम के बाद जब शव घर पहुंचा था तो परिजन व ग्रामीण शव दरवाजे पर ही रखकर धरना दे लगे थे। आरोप है कि ट्रैक्टर-ट्राली पलटने के बाद जेसीबी संचालक व दूसरे ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गए,बचाए होते तो अमरजीत की जान बच गई होती।