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Kushinagar News: नोडल की जांच में सब ‘ठीक’ क्रॉस चेकिंग में खुल रही पोल

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पडरौना। विभाग की सख्ती के दावों के बावजूद जिले में अवैध निजी अस्पतालों का जाल तेजी से फैल रहा है। अवैध अस्पतालों पर शिकंजा कसने के लिए बनाए गए नोडल अफसर की जांच में सब कुछ ‘ठीक’ मिल रहा है लेकिन एडी हेल्थ गोरखपुर की क्राॅस चेकिंग में वैध अस्पतालों में भी रजिस्टर्ड डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं।
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जांच में कई ऐसे मामले सामने आए कि जिस डॉक्टर की डिग्री पर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन है, उसको पता तक नहीं है। कई अस्पतालों के पंजीकरण में फर्ज डिग्री का भी इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में नोडल अफसर की भूमिका और सीएमओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में भी खेल : शासन की सख्ती के बाद सभी निजी अस्पतालों के पुराने पंजीकरण निरस्त कर नए सिरे से ऑनलाइन आवेदन कराए गए। नोडल अफसर को मौके पर जांच कर रजिस्ट्रेशन देने की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन यहीं से गड़बड़ी शुरू हुई। सूत्रों का कहना है कि कागजों में जांच पूरी कर अस्पतालों को वैधता दे दी गई, जबकि जमीनी हकीकत अलग है।
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हाल ही में रामकोला कस्बे में संचालित गीतांजलि हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत के बाद जांच में पता चला कि जिस डॉक्टर के नाम से अस्पताल का रजिस्ट्रेशन है, वह आया ही नहीं है और हॉस्पिटल के संचालक अरविंद शर्मा की पत्नी की डॉक्टर की डिग्री फर्जी है।
शहर के छावनी में संचालित जीवन रक्षक अस्पताल का भी गोरखपुर के एक डॉक्टर की डिग्री पर रजिस्ट्रेशन कर दिया गया था। जांच में पता चला कि गोरखपुर के जिस डॉक्टर की डिग्री लगी है, वह कभी पडरौना आए ही नहीं हैं। डिग्री की जांच करने वाले अधिकारी या संचालक पर कार्रवाई के बजाए सिर्फ अस्पताल का रजिस्ट्रेशन निलंबित कर खानापूरी कर ली गई।
एडी हेल्थ की टीम जनवरी में पडरौना आई। सिधुआ के कुुशवाहा अस्पताल पहुंची तो पता चला कि झोलाछाप ने एक महिला का ऑपरेशन किया था। टीम के आने की सूचना पर ओटी में मरीज को छोड़कर पीछे के रास्ते भाग निकला। टीम ने नोडल अफसर डॉ. आरके गुप्ता को फोन किया तो बताया कि अस्पताल का रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में है। जब टीम ने बताया कि मौके पर वह मौजूद है, तब नोडल अफसर और नायब तहसीलदार पहुंचे और अस्पताल को सील किया।
13 फरवरी 2026 को एडी हेल्थ के निर्देश पर जेडी डॉ. अरुण कुमार के नेतृत्व में टीम ने कसया में सात अस्पतालों की जांच की। तीन अस्पताल ऐसे मिले जिसका पंजीकरण तो था, लेकिन कोई डॉक्टर नहीं था। एक नाम से दो अस्पताल संचालित मिले, जहां एक ही डाक्टर बैठते हैं।
वहीं जांच में हाईवे के किनारे संचालित दीनदयाल हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन ही नहीं था। संचालक पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई पर अस्पताल बंद नहीं हुआ। इसके अलावा वरदान, किलकारी, आकृष्ट, आशीर्वाद, सरस्वती चाइल्ड केयर, होम सिटी हास्पिटल को जेडी ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा। पूर्व जेडी हेल्थ की ओर से की गई जांच के बाद सीएमओ को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई, लेकिन मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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