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Kushinagar News: तेल में पाॅम ऑयल और खोअा में आलू की मिलावट

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संवाद न्यूज एजेंसी
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पडरौना। अब आप तेल खरीदने के बाद मात्र उसकी चमक पर भरोसा नहीं कर सकते। उसकी चमक में भी मिलावटी हो सकती है।
शुद्धता की पहचान के लिए यह जांचना होगा कि कहीं तेल जम तो नहीं रहा है। बाजार में मिलावट वाला सरसों तेल खुलेआम बिक रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में खुद इसकी पुष्टि हो चुकी है। धंधेबाज मुनाफे के चक्कर में पॉम ऑयल मिलाकर सरसों का तेल तैयार कर रहे हैं। यही नहीं खोअा में कारोबारी आलू या मैदा मिलाकर बेच रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि लगातार अभियान चलने के बाद भी इसकी खेप बाजार में पहुंचाई जा रही है।
बाजार में मिलावटी सरसों के तेल की जगह-जगह बिक्री हो रही है। असली और मिलावटी तेज की पहचान दुकान पर करना संभव नहीं है। इसलिए ग्राहक धोखा खा रहे हैं। ऐसे में सचेत रहना जरूरी है। पहले नमूने के तौर पर परखें और फिर तय करें, कहीं तेल मिलावटी तो नहीं है। शहर में बिक रहे सरसों तेल में पाॅम ऑयल और रिफायंड की मिलावट की जा रही है, जो फ्रिज में रखते ही वनस्पति घी की तरह जम रहा है। मिलावटखोर राइस ब्रॉन को भी सरसों के तेल में मिलाकर बेच रहे हैं। इसकी पुष्टि खाद्य विभाग को सरसों तेल की प्रयोगशाला से मिली जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है।
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक बाजार में बिक रहे सरसों के तेल में पांच ऑयल और रिफायंड मिला था। यही नहीं दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में मिठाइयों और दूध की मांग में वृद्धि हो जाती है। इस समय मिलावटी दूध और मिठाइयों की बिक्री भी तेजी से बढ़ जाती है। यह मिलावट न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह त्योहार के आनंद को कम कर सकती है। मिठाई कारोबारी दूध से बनी मिठाइयों में खोआ की मात्रा कम कर उसमें आलू या मैदा मिला देते हैं। इस मिलावट की पहचान जांच में ही पता चल सकेगी। वहीं अरहर और मसूर दाल को केमिकल लगाकर चमकाया जा रहा है, जो लीवर के लिए घातक है।
कसया के फाजिलगर रोड पर ए टू जेड दुकान पर अरहर की दाल की हुई जांच में इसकी पुष्टि हुई है। एक अप्रैल से सितंबर तक खाद्य विभाग की तरफ से विभिन्न दुकानों की जांच कर 48 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे। वहां से इस वित्तीय वर्ष में प्रयोगशाला से कुल दूध और दूध से बने उत्पादों के 101 नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इसमें से 78 नमूने प्रयोगशाला की जांच में खरे नहीं उतरे हैं। उसमें आलू और मैदा की मिलावट मिली है।
तेल निकालते समय ही होता है खेल, बाहर से आता है मिलावटी खोआ : सरसों के तेल में पाॅम ऑयल, रिफायंड या राइस ब्रॉन को मिलावटखोर सरसों का तेल निकालते समय ही कर लेते हैं, जबकि दूध बेचने वाले उसमें से मलाई निकालकर बेचते हैं। बिना मलाई के दूध से पनीर या छेना बनाने पर उसमें फैट कम हो जाता है। इसके अलावा कुछ मिलावटखोर पनीर या छेने की मिठाई में पाउडर मिला देते हैं, जबकि खोआ में स्थानीय कारोबारी मिलावट नहीं करते, वे कानपुर, गोरखपुर समेत अन्य शहरों से रेडीमेड खोआ मंगाते हैं।
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ऐसे करें पहचान : यदि कढ़ाई में आंच लगते ही सरसों तेल से तेज झाग आ जाए और आंखों में जलन होने लगे तो समझ लीजिए कि तेल मिलावटी है। ऐसा तेल में डाले गए सेंट के कारण होता है। मिलावटी तेल जल्द गर्म हो जाता है। उसमें जलने की गंध भी आती है। यह तेल पाचन क्रिया को खराब कर देता है। इस तरह के तेल के इस्तेमाल से एसिडिटी और कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती है। लोगों को सेहत के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। खुद ही सरसों खरीद कर तेल की पेराई करानी चाहिए। यदि पैकेट वाले तेल खरीद रहे हैं तो लेवल पढ़ना चाहिए। इसमें एफएएसएसएआई और एफपीओ मार्का हो तो बेहतर होगा। इसी तरह मिठाई में सिंथेटिक रंग मिलाया जाता है। अगर मिठाई खोए की बनी है और खोया ज्यादा दानेदार है, तो इसका मतलब है कि उसमें मिलावट की गई है। अगर मिठाई दूध से बनी है, तो एक टुकड़ा उंगलियों पर मसलकर देखें।
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