पडरौना। सीएचसी पर रात्रि विश्राम नहीं करने वाले डाॅक्टरों की जवाबदेही तय होगी। सामान्य मरीजों को भी मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाने के चलते मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पर लोड बढ़ता जा रहा है। जांच में पता चला है कि कुछ सीएचसी पर डाॅक्टर रात में नहीं रुक रहे हैं और फार्मासिस्ट व वार्ड ब्वाय के भरोसे इमरजेंसी का संचालन हो रहा है। सीएमओ ने सभी एमवाईसी को रात्रि विश्राम के लिए निर्देश दिया है। रात में क्राॅस चेकिंग के लिए टीम बनाई गई है।
जिले में 14 सीएचसी हैं। हाईवे से जुड़ी सीएचसी में तैनात डाॅक्टर गोरखपुर और देवरिया से आते हैं और शाम चार बजे के बाद चले जाते हैं। रात की इमरजेंसी में जिन डाॅक्टरों की ड्यूटी रहती है, वे अपने कमरे में रहते हैं। फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय के भरोसे मरीजों का इलाज होता है। तेज पेट दर्द, हाई बीपी वाले मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जा रहा है।
करीब दो माह पूर्व डीएम ने सामान्य मरीजों को रेफर करने पर रोक लगाने के लिए सीएमओ को निर्देश दिया था, उस समय पहल भी हुई थी,बावजूद इस पर रोक नहीं लगा। सीएमओ ने एमओआईसी को निर्देश दिया है कि रात में सभी डाॅक्टर विश्राम करेंगे। इसकी क्राॅस चेकिंग की जाएगी। गायब मिलने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। इनके भवन के मेंटेनेंस और बिजली बिल पर लाखों रुपये महीने खर्च किए जा रहे हैं।
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कई बार हो चुका है विवाद
रात में गंभीर मरीजों को लेकर जाने पर डाॅक्टर नहीं मिलते हैं। वार्ड ब्वाय और फार्मासिस्ट इलाज करते हैं। इसका विरोध करने पर कई बार तीमारदारों से विवाद हो चुका है। मामला बढ़ने पर आवास से डॉक्टर आते हैं। छह माह के अंदर देवतहा सीएचसी, दुदही, रामकोला सीएचसी पर विवाद हो चुका है। बाद में पता चलता है कि डाॅक्टर देरी से आए।
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-स्वास्थ्यकर्मियों व डाक्टर को अपने आवास पर ही रात्रि विश्राम करना है। कई सीएचसी के डाॅक्टर शाम को चले जा रहे हैं। इसकी जांच के लिए टीम बनाई गई है। क्राॅस चेकिंग कराई जाएगी। सामान्य मरीजों को बिना वजह रेफर नहीं करना है। इसकी भी मॉनिटरिंग की जा रही है। -डॉ. चंद्रप्रकाश, सीएमओ कुशीनगर