रामकोला थाना क्षेत्र के मोरवन इमलिया में तेजाब से हुए हमले के चौथे दिन रोती बिलखती काजल या दव क
रामकोला। जिंदगी और मौत के बीच झूल रही ममता की चीखें मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में सन्नाटे को चीर रही हैं। एसिड अटैक की शिकार लीलावती की हालत में तीसरे दिन भी कोई खास सुधार नहीं हुआ है। दर्द से कराहते हुए वह जैसे ही होश में आती हैं, उनकी जुबान पर सिर्फ बेटी काजल का नाम होता है, और अगले ही पल वह फिर बेहोश हो जाती हैं।
लीलावती मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के आईसीयू में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, तेजाब के गहरे जख्मों और मानसिक सदमे ने उन्हें बुरी तरह तोड़ दिया है। वह रह-रहकर अपनी बेटी को पुकारती है, शायद उस खौफनाक मंजर की यादें उसे बार-बार बेहोशी की ओर धकेल रही हैं। डॉक्टरों की टीम उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
इधर गांव में घटना के तीसरे दिन रविवार को भी माहौल गमगीन रहा। गांव की गलियों में सन्नाटा ऐसा कि किसी के चलने की आहट भी साफ सुनाई दे रही है। इस दरिंदगी के बाद से ग्रामीणों में आक्रोश है। पड़ोसियों का कहना है इस क्रूरता ने पूरे गांव को हिला कर रख दिया है। कई घरों में तीसरे दिन भी चूल्हा नहीं जला। लोगों में गम है तो आरोपियों के खिलाफ आक्रोश भी है। सभी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं,ताकि कोई ऐसा कृत्य करने से पहले ही सहम जाए।
यह है मामला
रामकोला थाना क्षेत्र के मोरवन गांव के इमिलिया टोला में बृहस्पतिवार की रात में कमरे में सो रही 58 वर्षीय मां लीलावती और 23 वर्षीय बेटी काजल पर दो युवकों ने एसिड फेंक दिया था। बुरी तरह झुलसी मां-बेटी को परिजन रामकोला सीएचसी ले गए। वहां से कुशीनगर मेडिकल कॉलेज फिर डॉक्टरों ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल काॅलेज गोरखपुर में इलाज के दौरान काजल की मौत हो गई। मां लीलावती देवी जीवन और मौत से जूझ रही हैं। मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी छोटेलाल खरवार, उसके दोस्त अनुज कुशवाहा और विवेक कुशवाहा को गिरफ्तार कर शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया। वहां से तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।