पडरौना। महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर के धरोहर स्थलों पर सुरक्षा के लिहाज से करोड़ों रुपये की लागत से लगे पीटीजेड (पैन टिल्ट जूम) कैमरे करीब एक पखवारे से बंद पड़े होने की खबर छपते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।
स्थानीय प्रशासन में सक्रियता दिखाई दी। तहसीलदार धर्मवीर सिंह बंद पड़े कैमरों के चालू करवाने के लिए तकनीकी टीम के साथ बृहस्पतिवार सुबह करीब 11 बजे पहुंच गए। टीम ने कंट्रोल रूम में आई खराबी का जायजा लिया। टीम ने बताया कि लखनऊ से उपकरण मंगाकर कैमरे चालू कराए जाएंगे।
पर्यटन विभाग की तरफ से वर्षों पहले करोड़ों रुपये की लागत से मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर, मांथा कुंवर मंदिर, रामाभार स्तूप व पार्किंग स्थल पर सुरक्षा बंदोबस्त के लिए कैमरे लगाए गए थे। लेकिन बिजली के गिरने के साथ कंट्रोल रूम में लगा यूपीएस जल गया है। लखनऊ से आने के बाद ही कैमरों के चालू होने का दावा किया जा रहा है।
वहीं,पर्यटक पुलिस निर्धारित जगहों पर दिखाई नहीं दी। जिसमें मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर चाइनीज टेंपल, वर्मी मंदिर, मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर के प्रवेश द्वार, दक्षिणी गेट, तिब्बती मंदिर,थाई मंदिर,कोरिया मंदिर,जापान-श्रीलंका मंदिर, श्रीलंका बुद्ध विहार, रामाभार स्तूप, हिरण्यवती के बुद्धा घाट स्थल पर कहीं दिखाई नहीं दी।
इसके अलावा पर्यटक पुलिस पुरातत्व विभाग के बने कैफेटेरिया में अपने बैठने का ठिकाना बना लिए हैं। जहां से कोई भनक लगने पर ही बाहर निकलते हैं,न तो वहीं बैठकर डयूटी पूरी करते हैं।
यह हम नहीं कह रहे हैं बस्ती से आए मनोज चौहान,रवि सिंह, संदीप सिंह , महराजगंज से आए हरीश मिश्र, सलोनी कुमारी, सूर्य प्रकाश आदि कहना था कि कुशीनगर काफी संवेदनशील जगह है लेकिन यहां पर सुरक्षा बंदोबस्त के लिए एक मेटल डिटेक्टर तक नहीं है।