गोरखपुर। आसमान की ऊंचाइयों पर देश की हिफाजत करने वाले वायुसेना प्रमुख एपी सिंह जब बृहस्पतिवार को बच्चों के बीच पहुंचे तो माहौल में उत्साह के साथ अपनापन भी घुल गया। संस्कृति पब्लिक स्कूल, गोरखपुर और साखी माथाबारी स्थित सरस्वती गुरुकुल स्कूल के विद्यार्थियों ने उनसे बेझिझक सवाल पूछे।
उन्होंने हर सवाल का सहजता से जवाब देते हुए सफलता से ज्यादा संस्कार और जिम्मेदारी को जीवन का आधार बनाने की सीख दी। इस आत्मीय संवाद का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब रोते हुए आयुष को उन्होंने गोद में उठाकर दुलार दिया। बच्चों के बीच वायुसेना प्रमुख का यह रूप उन्हें लंबे समय तक याद रहेगा।
संस्कृति पब्लिक स्कूल की वंशिका ने फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर और टारगेट हिट करने से जुड़ा सवाल पूछा। जवाब में एपी सिंह ने कहा कि फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर उड़ान के दौरान गति, ऊंचाई, दिशा, इंजन और अन्य तकनीकी मापदंडों से जुड़ी जानकारियां रिकॉर्ड करता है। दुर्घटना के बाद इसकी मदद से विमान की अंतिम स्थिति और घटनाक्रम का पता लगाने में मदद मिलती है। टारगेट को हिट करने में कई तकनीकों का एक साथ इस्तेमाल किया जाता है।
एसएसबी के लिए पैशन और फायर जरूरी
दूसरा सवाल इसी स्कूल की श्रुति पांडेय ने ऑपरेशन सिंदूर की चुनौती को लेकर किया। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि प्लान को लागू किया जाता है। जैसे अभ्यास करते हैं, उसी तरह युद्ध के दौरान भी लड़ा जाता है। इसी स्कूल की श्रेया सिंह ने एसएसबी की तैयारी को लेकर जानकारी चाही। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि एसएसबी में उन्हीं का चयन होता है, जिनमें पैशन और फायर हो। सुष्मिता सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सवाल किया। जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी ऑपरेशन में वैसा नहीं होता, जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्णय से टारगेट तय होता है। गट फीलिंग भी कई बार मददगार होती है। टारगेट तय करने से लेकर हिट करने तक पूरी टीम काम करती है।
फाइटर प्लेन में डर नहीं लगता?
सरस्वती गुरुकुल के अयांश ने पूछा कि आपको फाइटर प्लेन में डर नहीं लगता? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अगर तैयारी हो तो डरने की जरूरत नहीं होती। आरोही ने जानना चाहा कि प्लेन उड़ाते समय उन्होंने अपना घर देखा है क्या? जवाब में उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम का उदाहरण देते हुए कहा कि धरती का हर कोना उनके घर जैसा है। छात्र ओम ने हैंगर और हवाई जहाज के उड़ने के बारे में जानना चाहा। उन्होंने कहा कि जहाज हैंगर में रखे जाते हैं। आपकी तरह जहाज को भी खाने की जरूरत होती है लेकिन उसका खाना अलग होता है। अंशुल ने पूछा कि जहाज की डिजाइन चिड़ियों जैसी क्यों होती है? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इससे उड़ान भरने में आसानी होती है।
युद्ध में खतरा नहीं परिणाम होता है महत्वपूर्ण
मीरा ने ऑपरेशन सिंदूर में खतरों को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि युद्धकाल में ऑपरेशन में खतरा नहीं, उसका परिणाम अधिक महत्वपूर्ण होता है। कीर्ति ने पूछा कि कुछ लोग धैर्य क्यों जल्दी खो देते हैं? जवाब में उन्होंने कहा कि कुछ ही नहीं, सभी लोगों में धैर्य की कमी आ गई है। अमृतांश के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम से सब कुछ संभव है। आयुष्मान और रुचि ने सैन्य सेवा की तैयारी, नेतृत्व और प्रबंधन को लेकर सवाल किए। जवाब में उन्होंने कहा कि परीक्षा के लिए न्यूनतम योग्यता पहली शर्त है। इसके बाद खुद सब सीखना होगा। असफलता से ही सफलता का नया रास्ता खुलता है। युवाओं से संवाद के दौरान श्रेया जायसवाल के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ाई हर मुश्किल को आसान बना देती है। सभी को कभी न कभी अप्रिय घटनाओं का सामना करना पड़ता है लेकिन इससे निपटना भी सीखना होगा। युवा रोहित सिंह ने अनुशासन और आत्म-अनुशासन को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी सोच का अनुसरण करें।