पडरौना। उद्यान विभाग की तरफ से राजकीय आलू प्रक्षेत्र, कसया (बरवां फॉर्म हाउस) में केला टिश्यू कल्चर लैब बनाया जाएगा। इसके निर्माण पर 467.28 लाख रुपये खर्च होंगे। राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति की बैठक में इसके लिए अनुमति मिल चुकी है। विभाग के मुताबिक आगे की प्रकिया जारी है। इसके पूरा होते ही निर्माण के लिए कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।
टिश्यू कल्चर लैब के निर्माण से केला उत्पादक किसानों को काफी सहूलियत होगी। इस लैब से किसानों को उन्नत किस्म के पौधे मिलेंगे। इसके साथ ही केले की खेती में होने वाली बीमारियों और कम उत्पादन की समस्या का भी स्थायी समाधान होगा। विभाग के मुताबिक अभी जिले में अनुमानित 16 हजार हेक्टेयर में केले की खेती की जा रही है।
केला एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) में भी शामिल है। इसके बावजूद किसानों को केला के पौधों की उपलब्धता की कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है। लैब के निर्माण से उनकी यह परेशानी दूर हो जाएगी। अभी किसान केले की खेती के लिए पुराने सकर्स पौधों की गांठों पर निर्भर हैं, जिससे पौधे में बीमारियां लगने और कम उत्पादन का खतरा बना रहता है।
इस लैब से उन्हें सुपर प्लांट्स मिलेंगे। इससे जो वर्तमान में प्रत्येक पौधों की खरीद के लिए करीब 19-20 रुपये खर्च हो रहे हैं, उन्हें करीब 10-12 रुपये में उपलब्ध हो जाएंगे। शुद्धता व सुलभता दोनों सरल हो जाएगी।
जिला उद्यान अधिकारी, कुशीनगर कृष्ण कुमार ने कहा कि टिश्यू लैब की स्थापना का मकसद केला उत्पादक किसानों को उन्नत व रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराना है। लैब से एक साथ 25 लाख केले के पौधे तैयार किए जाएंगे। इसके बनने से केले की पैदावार बढ़ेगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। जिले में मौजूदा समय में 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में केले की खेती की जा रही है। खेती का रकबा व उत्पादन दोनों में इजाफा होगा।
2018 में एक जिला, एक उत्पाद में केले का हुआ चयन
कुशीनगर का केला 2018 में एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत चयनित हुआ था। तब से केला और इससे बनने वाले उत्पादों जैसे जूस, चिप्स, आटा, अचार और केले के रेशे से बने पर्स, योग मैट, चप्पल आदि को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
यह होती है टिश्यू कल्चर तकनीक
टिश्यू कल्चर एक अत्याधुनिक पद्धति है। जिसमें एक स्वस्थ पौधे की कोशिका सेल से लैब के भीतर हजारों की संख्या में नए पौधे तैयार किए जाते हैं। ये पौधे पूरी तरह से रोगमुक्त और जेनेटिकल शुद्ध होते हैं। परंपरागत खेती में किसान सकर्स पुराने पौधे के बगल से निकलने वाले छोटे पौधे का उपयोग करते हैं, जिनमें अक्सर वायरस और फफूंद का खतरा बना रहता है।
लैब से पूरे साल मिलेंगे पौधे
केला टिश्यू कल्चर लैब की स्थापना से केला उत्पादक किसानों को बीमारी से रोगमुक्त पौधे मिलेंगे। ये पौधे वायरस और मिट्टी से होने वाली बीमारियों से मुक्त होंगे। इसमें पौधों के खराब होने का जोखिम कम होता है। इससे तैयार सभी पौधों की लंबाई और फल लगने का समय एक जैसा होता है। इससे कटाई और मार्केटिंग में आसानी होती है। पारंपरिक पौधों के मुकाबले ये पौधे तेजी से बढ़ते हैं। इनमें फल का गुच्छा बड़ा और वजनी होता है। इसमें पैदावार पारंपरिक के अपेक्षा 25 से 30 फीसदी की अधिक होती है। यही, नहीं इससे पैदा होने वाले केले की गुणवत्ता, चमक और साइज वैश्विक स्तर की होती है। उत्पादन के बाद किसानों को मंडियों में बेहतर कीमत मिलती है। लैब से साल भर किसान पौधे प्राप्त कर सकते हैं। इसमें मौसम का कोई असर नहीं पड़ता है।