तमकुहीरोड। पिपराघाट के गोवर्धन टोला में गंडक नदी की कटान तेज होने से यहां के लोग पलायन करने लगे हैं। यहां के लोगों में दहशत है। गंडक की धारा में विलीन होने से बचाने के लिए ये लोग अपनी झोपड़ियों और घरों को को खुद उजाड़ने लगे हैं। सोमवार की नदी की कटान बढ़ जाने से अफरातफरी मची रही। तीन दिन पहले तक पिपराघाट के गोवर्धन टोला से गंडक नदी लगभग पचास मीटर दूर थी और खेतों में बोई गई गन्ने, धान की फसल को अपनी धारा में विलीन कर रही थी। रविवार से अचानक कटान बढ़ गई और नदी का रुख सीधे इस गांव की ओर हो गया। इससे यहां के लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। लोग वर्षों पुराने फूस के घर को उजाड़ने में जुट गए हैं। सोमवार को नदी गांव तक पहुंच गई। लोग अपने उजाड़े घर और अन्य सामान को लेकर ट्रैक्टर-ट्राली और बैलगाड़ी से सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जिस वेग से नदी की कटान हो रही है, उससे यही आशंका जताई जा रही है कि दो दिनों में गोवर्धन टोला का अस्तित्व खत्म हो जाए। सोमवार को सुबह से हरिकेश, मोती, मैनेजर, होरिल, शंकर, रमेश, रामदयाल सहित अन्य लोग अपनी झोपड़ियों और सामान के साथ पलायन करते नजर आए। इन लोगों ने बताया कि पूरे गांव में अफरातफरी मची है। इन लोगों ने बताया कि इस टोला में 69 परिवार कई दशकों से रहते आ रहे हैं, पर नदी की कटान ने इन्हें यहां से उजड़ने के लिए विवश कर दिया। यहां के लोगों की सहायता में लगे पिपराघाट के ग्रामप्रधान विद्यासागर सिंह ने प्रशासन से विस्थापित लोगों के पुनर्वास और राहत मुहैया कराए जाने की मांग की है। इस बारे में तहसीलदार राजेश गुप्ता का कहना है कि नदी की कटान से होने वाली क्षति के आंकलन के लिए लेखपालों को लगाया गया है। एक-दो दिन में राहत के लिए चेक भी पीड़ितों को मुहैया करा दिया जाएगा।
दहारी और तवकल टोले पर भी खतरा
गोवर्धन टोले से जहां लोग पलायन कर रहे हैं, वहीं दहारी और तवकल टोला पर भी खतरा मंडराने लगा है। इन दोनों टोलों के लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। तवकल टोला निवासी पुजारी सिंह का कहना है कि यदि नदी की कटान को रोका नहीं गया तो इन दोनों टोलोें को भी बचाना प्रशासन के लिए मुश्किल होगा। यहां के रामन, राजमंगल, बेचू, वकील आदि ने प्रशासन से कटाने को रोकने के लिए इंतजाम किए जाने की मांग की है।