कसया। महाकवि सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय का जन्म कुशीनगर में हुआ था। पर कुशीनगर में सोमवार की रात को यह पहला अवसर था जब साहित्यकारों, बौद्ध भिक्षुओं, जिले भर के प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य लोगों ने एक साथ अज्ञेय को शिद्दत से याद किया। उनकी स्मृतियों को साझा किया और उसे संजोने का संकल्प लिया।
अवसर था अज्ञेय की स्मृति में राजकीय बौद्ध संग्रहालय में बने अज्ञेय स्मृति सभागार के लोकार्पण का। टेंपल एरिया मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन डीएम रिग्जियान सैम्फिल ने अज्ञेय की स्मृति में कुशीनगर में कुछ यादगार करने की ठानी। जिसके बाद अज्ञेय स्मृति सभागार का स्वरूप उभर कर सामने आया। हालांकि लोकार्पण के वक्त डीएम उपस्थित नहीं रह सके। उनको अचानक विदेश यात्रा पर जाना पड़ा। अज्ञेय की स्मृतियों को साझा करने के दौरान उनकी अंतिम कुशीनगर यात्रा का जिक्र करते इतिहासकार वीरेंद्र तिवारी ने कहा कि जनकपुर से अयोध्या की यात्रा के दौरान अज्ञेय सहायक इला डालमिया और साथियों के साथ जब वे कुशीनगर पहुंचे तो काफी भावुक होकर बचपन की स्मृतियों में खो गए थे। अज्ञेय साथियों को बार-बार उस जगह की ओर इशारा करते थे जिस स्थान पर लगे टेंट में उनका जन्म हुआ था।
सीडीओ जर्नादन बर्नवाल, एडीएम डॉ. अखिलेश मिश्र, एसडीएम सचिन कुमार सिंह, एसडीएम पंकज वर्मा, नगरपालिका अध्यक्ष शिवकुमारी देवी, प्रधानाचार्य शैलेंद्रदत्त शुक्ल, डॉ. रीतेश चौधरी, बौद्ध भिक्षु महेंद्र, भिक्षु अस्स जी, साहित्यकार पं. यमुना प्रसाद उपाध्याय ने लोकार्पण की औपचारिकता पूरी की। अभी डीएम की योजना सभागार में अज्ञेय का विशाल तैल चित्र, परिसर में अज्ञेय स्मृति वाटिका और अज्ञेय की एक प्रतिमा स्थापित करने की भी है।