तुर्कपट्टी। तीन गांवों में आग लगने से 13 एकड़ खड़ी गन्ना की फसल जलकर बर्बाद हो गई। पुआल जलाने से लगी आग से किसानों में विवाद की भी स्थिति आई। गांववालों की सूझबूझ से मामला निपट गया।
तुर्कपट्टी महुअवां गांव के संतोष शाही के पांच बीघे गन्ना के खेत में बुधवार की दोपहर बाद आग लग गई। देखते देखते पूरी फसल जल गई। गांव के लोगों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली। इसी गांव के बंटी शाही की दो बीघा गन्ना की फसल, टुनटुन शाही की दो बीघा गन्ना की फसल और नारायण शाही की दो बीघा गन्ना की फसल जलकर राख हो गई। मंगलवार की दोपहर को गुरवलिया के उपाध्याय टोला में रामधारी गुप्ता की डेढ़ एकड़ गन्ना की फसल और महासोन निवासी इद्रीस अली और सुबाष यादव की एक बीघा गन्ना की फसल जल गई। सभी घटनाओं में पुआल खेत में जलाने के कारण आग लगी। कंबाइन मशीन धान की बाली को तो काट रहा है पर डंठल खेतों में छोड़ दे रहा है। इसे किसान जला रहे हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने गेहूं और धान के डंठल को खेतों में जलाने पर प्रतिबंध लगा रखा है।
चार रिहायशी झोपड़ियां जलीं, नौ उजाड़ी गईं
तमकुहीरोड। तरयासुजान क्षेत्र के जवही मलही मुस्तकीम गांव में आग लगने से चार झोपड़ियां पूरी तरह जल गईं जबकि आग से बचाव के लिए नौ और लोगों की झोपड़ियां उजाड़ दी गईं। आग लगने की सूचना मिलने पर क्षेत्रीय विधायक, ग्राम प्रधान और राजस्वकर्मियों ने गांव में जाकर अग्निपीड़ितों की मदद की।
राजस्व ग्राम जवही मलही मुस्तकीम में लगी आग में रमजान, क्यामुद्दीन, रुस्तम और फारूक की रिहायशी झोपड़ियां धू-धूकर जलने लगीं। आग लगने की खबर पूरे गांव में फैल गई। जो जहां था, वहीं से दौड़ पड़ा। आग का फैलाव और न बढ़े, इसके लिए गांववालों ने नूर मोहम्मद, फूल मोहम्मद, मनोज, मुस्लिम, नागेंद्र, शंभू, मुनीर की झोपड़ियां भी उजाड़ दी गईं। इसके बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान घरों में रखे लाखों रुपये के सामान जलकर राख हो गए। घटना की सूचना मिलने पर क्षेत्रीय विधायक अजय कुमार लल्लू, ग्राम प्रधान रूदल यादव भी मौके पर पहुंच गए और अग्निपीड़ितों को अपनी तरफ से तात्कालिक राहत के लिए प्लास्टिक, चिउड़ा, गुड़, चावल, गेहूं और अन्य आवश्यक सामग्रियां वितरित कराईं। मौके पर पहुंचे हलका कानूनगो विदेशी शर्मा और लेखपाल जयंत कुमार गुप्त ने आग लगने में हुए नुकसान का जायजा लिया और अपनी रिपोर्ट तहसीलदार को भेजी।