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इंसेफेलाइटिस से दो बच्चियों की मौत, तीन रेफर

Fri, 15 Nov 2013 05:40 AM IST
Kushinagar
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पडरौना। इंसेफेलाइटिस रोगियों की जान पर खतरा अब भी बना हुआ है। संयुक्त जिला चिकित्सालय के एईएस वार्ड में भर्ती एक बच्ची ने इस जानलेवा बीमारी से जूझते हुए बुधवार की देर रात दम तोड़ दिया, जबकि एक बच्ची बृहस्पतिवार को दोपहर में चल बसी। तीन बच्चे मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिए गए हैं।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय में जेई और एईएस के करीब दस बच्चों का इलाज एईएस वार्ड में चल रहा था। बुधवार की रात तकरीबन ढाई बजे पडरौना कोतवाली क्षेत्र के नोनियापट्टी निवासी हकीम अली की तेरह वर्षीया पुत्री साजमा खातून की इस बीमारी के चलते मौत हो गई। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के सिरसिया कला गांव के निवासी क्यामुद्दीन का पांच वर्षीया पुत्री मुस्कान भी बृहस्पतिवार को दोपहर साढ़े बारह बजे इलाज के दौरान इस दुनिया से चल बसी। साखोपार की पांच वर्षीया आशा, गौरी श्रीराम की दस वर्षीया सकीना खातून और छह वर्षीया सबाना को मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया। इसके अलावा दुमही की छह वर्षीया रानी और सिसवा के साढ़े तीन के विनय सहित कई बच्चों का इलाज एईएस वार्ड में चल रहा है।

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थमती रही सांसें, रोते रहे परिजन
कई दिनों से जिला अस्पताल के एईएस वार्ड में भर्ती थीं दोनों मरीज
राकेश कुमार गौंड़/संतोष वर्मा
पडरौना। अस्पताल लोग इस उम्मीद में पहुंचते हैं कि समय पर इलाज हो जाएगा और मरीज स्वस्थ होकर अपने घर पहुंच जाएगा। लेकिन बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल के इमरजेंसी गेट पर कुछ और ही दृश्य था। दस साल की एक बच्ची की सांसें टूटती जा रही थीं और उसके परिवारीजन उसे सीने से लगाए रोए जा रहे थे। लेकिन काफी देर तक न तो उसे एंबुलेंस उपलब्ध कराया गया और न ही इलाज का कोई इंतजाम किया गया।
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गौरीश्रीराम गांव के निवासी समशुद्दीन की दो बच्चियां सकीना खातून (10) और सबाना (06) तेज बुखार से पीड़ित थीं। चार दिनों पूर्व परिवारीजन उन्हें लेकर जिला अस्पताल आए थे। इन बच्चियों का इलाज एईएस वार्ड में चल रहा था। इमरजेंसी गेट पर सकीना को सीने से लगाए उसकी मामी जुबैदा खातून ने बताया कि आज अचानक दोनों बच्चियाें को रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं दी गई। एक बच्चे के गले से तो पानी तक नहीं उतर रहा है। लोगाें के कहने पर एक प्राइवेट अस्पताल में भी ले गई लेकिन वहां भी इलाज नहीं हुआ। बच्ची की सांस डूबती जा रही है। अब कहां लेकर इसे जाएं? जुबैदा खातून और समशुद्दीन का कहना था कि अगर रेफर ही करना था तो इतने दिन रोककर क्यों रखा गया? आखिर उनकी मौत हो गई।
इस संबंध में सीएमएस डॉ. सीपी दुबे का कहना था कि मरीज को मेडिकल कालेज भेजवाने के लिए 108 नंबर का एंबुलेंस मंगाया था। एक वार्ड ब्वाय को भी इस कार्य में लगाया गया। लेकिन बच्ची के परिवारीजन मेडिकल कालेज जाने के लिए तैयार नहीं थे। मरीज के परिवारीजन रुपये मांग रहे थे लेकिन अस्पताल रुपये कहां से देगा? मरीज को लेकर परिवारीजन डीएम के पास भी गए थे।
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