प्रमाण पत्र देते विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी।
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कसया। कुशीनगर स्थित महापरिनिर्वाण बुद्ध मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय इंटरनेशनल त्रिपिटक चांटिंग समारोह का समापन सोमवार को विधि-विधान से किया गया। इस दौरान चांटिंग में शांति पाठ करने वाले विभिन्न देशों के बौद्ध भिक्षुओं को इंटरनेशनल त्रिपिटक चांटिंग काउंसिल की ओर से दान दिया गया।
समारोह के समापन सत्र को संबोधित करते हुए विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि इस त्रिपिटक चांटिंग से विश्व में खुशहाली के साथ शांति की स्थापना होगी। उन्होंने आईटीसी से अनुरोध किया कि यह कार्यक्रम और बड़े स्तर पर होना चाहिए। अपेक्षित सहयोग करने का भरोसा भी दिया। कहा कि जब मन शांत होता है तो व्यक्ति अध्यात्म की ओर बढ़ता है। विधायक ने भिक्षुओं को विश्वास दिया कि अगर कोई ठेला वाला हटेगा तो उसके पुनर्वास का भी इंतजाम किया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्लीन इंडिया अभियान में सबसे सहयोग करने की अपील की। भिक्षु संघ अध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर ने कहा कि हम सब बुद्ध हैं। इस त्रिपिटक चांटिंग से विश्व में जो गड़बड़ी चल रही है, उसे ठीक किया जाएगा। उन्होंने सरयार से भेदभाव न करने की अपील की। इस त्रिपिटक चांटिंग में भारतीय पुरातत्व विभाग से अपेक्षित सहयोग करने की उम्मीद जताई। कहा कि अनुमति एक दिन पहले मिली होती तो औरड भव्य और आकर्षक चांटिंग समारोह का आयोजन किया जाया होता।इसके अलावा लिनसन टेंपल,वाट थाई मंदिर प्रभारी सहित अन्य बौद्ध भिक्षुओं ने अपने विचार व्यक्त किए। इसके पूर्व विधायक त्रिपाठी सहित बौद्ध भिक्षुओं ने नौ कैंडल जलाकर भगवान बुद्ध की प्रार्थना की। अध्यक्षता कुशीनगर त्रिपिटक चांटिंग काउंसिल व भिक्षु संघ के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर और संचालन आयोजन समिति के सदस्य टीके राय ने किया।
अंत में इंटरनेशनल त्रिपिटक चांटिंग काउंसिल की डायरेक्टर वाग्मे डिक्स ने भारत सहित अन्य देशों के बौद्ध अनुयायियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस मौके पर अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष भंते नंदरतन, डाक्टर संजय सिंह, भंते चंदिमा, नगीना, ओमप्रकाश कुशवाहा और प्रेमचंद वर्मा आदि मौजूद थे।
इन टेंपल प्रभारियों को दिया गया प्रमाण पत्र
सोमवार को महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर में तृतीय इंटरनेशनल त्रिपिटक चांटिंग समारोह के समापन पर कुशीनगर के मोनास्ट्री प्रभारियों और बौद्ध अनुयायियों का प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसमें चाइनीज टेंपल, मल्लराम बुद्ध विहार, कंबोडिया टेंपल, वाट थाई टेंपल सहित अन्य शामिल थे।