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बीमारी से मौत के बाद जगी प्रशासन की संवेदना

Wed, 01 Nov 2017 06:22 PM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
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बीमारी से माौत के बाद गांव पहुंचे अ‌‌ध्‍ा‌िकारी। - फोटो : कुश्‍ाीनगर ब्यूरो
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जटहां बाजार (कुशीनगर) । इसे व्यवस्था जन्य दोष कहें या लाचार मुसहर परिवारों की बेबसी, परंतु हकीकत तो यही है कि इनकी मौत भी अब केवल हंगामा तक ही सीमित है। अफसर इनकी खोज खबर तब लेना शुरू करते हैं जब मौत की वजह भूख या गरीबी बताकर कुछ लोग आवाज उठाना चाहते हैं। हंगामा की आवाज को मंद करने के लिए हाकिम गांव पहुंचते हैं और मौत की वजह बीमारी बताते हुए कुछ मदद और हमदर्दी दिखाकर फिर उन्हें उसी हालात में छोड़कर वापस लौट आते हैं।
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बात कर रहे हैं खड्डा ब्लाक के गांव कटाई भरपुरवा के टोला सरया की मुसहर बस्ती में रहने वाले विरेंद्र मुसहर के परिवार की। आर्थिक तंगी से जूझ रहे विरेंद्र मुसहर के चार बच्चे हैं। दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का पेट पालने विरेंद्र की 12 वर्षीया बेटी उर्मिला की तबीयत एक पखवारा पहले खराब हो गई। उसे बुखार हो गया था तो इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। विरेंद्र के अनुसार कई दिन तक इलाज के बाद डॉक्टर ने इंसेफेलाइटिस का केस बताते हुए मेडिकल कालेज ले जाने की सलाह दी। रुपया नहीं होने की वजह से विरेंद्र बुखार से तपती बच्ची को लेकर घर चला आया। मंगलवार की शाम को उसकी मौत हो गई। गांव वालों के मुताबिक आर्थिक तंगी से जूझ रहे विरेंद्र की बेटी उर्मिला कुपोषित दिखती थी। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने जब उसे मेडिकल कालेज ले जाने की सलाह दी तो रुपयों की कमी के चलते वह बेटी को इलाज के लिए लेकर नहीं जा पाया। मंगलवार की शाम को घर पर ही उर्मिला की मौत हो गई।

किसी ने जब प्रशासन को मुसहर परिवार में भूख से बालिका के मौत की सूचना दी तो अफसर सुरखुरू हुए और मामले की छानबीन शुरू हो गई। रात में ही नायब तहसीलदार खड्डा राधेश्याम उपाध्याय गांव पहुंचे और मामले की जानकारी लेने के बाद कोटेदार को राशन आदि की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया। बुधवार की सुबह पूर्ति निरीक्षक धीरेंद्र त्रिपाठी भी पहुंचे और पीड़ित परिवार से जानकारी ली। बताया गया कि विरेंद्र की पत्नी दुर्गावती के नाम पर अंत्योदय कार्ड है लेकिन इस पर राशन नहीं मिलता है। वहीं कोटेदार का दावा था कि हर महीने इस कार्ड पर राशन उपलब्ध कराया जाता है।
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पूर्ति निरीक्षक ने बताया कि वे अपनी रिपोर्ट शाम तक अफसरों को सौंप देंगे। वहीं नायब तहसीलदार राधेश्याम उपाध्याय का मानना है कि यह परिवार गरीब तो है लेकिन लड़की की मौत भूख नहीं बल्कि बीमारी से हुई है। बहरहाल मामले का सच चाहे जो हो लेकिन इससे किसी को इंकार नहीं है कि एक गरीब परिवार की लड़की उचित इलाज के अभाव में इस दुनिया से चल बसी।
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