कुशीनगर। जलस्तर कम होते ही और खतरनाक हुई गंडक नदी ने अहिरौलीदान में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इस गांव के चित्तू टोला और कंचन टोला के सामने तेजी से नदी आबादी की तरफ बढ़ रही है। चित्तू टोला के तीन लोगों की झोपड़ियां नदी की धारा में विलीन होने से भयभीत गांव के अन्य लोगों ने अपना घर खाली करना शुरू कर दिया है।
बिहार बॉर्डर पर स्थित सेवरही ब्लॉक के गांव अहिरौलीदान के सामने पिछले तीन साल से गंडक नदी कटान कर रही है। बृहस्पतिवार से इस गांव के चित्तू टोला और कंचन टोला पर खतरा बढ़ा है। चित्तू टोला निवासी बिहारी यादव, भगत यादव व चंद्रिका यादव की झोपड़ियां नदी की कटान के चलते धारा में विलीन हो चुकी हैं। यहां के निवासी महातम यादव, राजालाल यादव आदि का कहना है कि प्रशासन ने कटान रोकने के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं किया। पूरे साल इस गांव के सामने कटान होता रहा। बरसात में स्थिति बिगड़ी, लेकिन प्रशासनिक अफसर खोज खबर तक लेने नहीं आए। सिंहासन, रामनाथ, ठग, उमेश, रामजीत, अवध किशोर, कोदई, भगेलू आदि का कहना है कि यदि कटान रोकने के लिए तत्काल उपाय नहीं किए गए तो कचहरी टोला व डीह टोला सहित अगल-बगल के कई अन्य गांव भी खतरे की जद में आ जाएंगे।
इस संबंध में तमकुहीराज के तहसीलदार रामप्यारे का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रभावित परिवारों को प्रशासन की तरफ से हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।