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माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा

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जिले के माध्यमिक स्कूलों में 883 शिक्षकों के पद खाली
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पडरौना। जब गुरु ही नहीं हैं तो ज्ञान कैसे मिलेगा? जनपद के अधिकतर विद्यालय एक या दो अध्यापकों के सहारे चल रहे हैं। कुल 883 शिक्षकों के पद खाली हैं। संस्कृत, अंग्रेजी और विज्ञान वर्ग के अधिकतर पद खाली हैं। हालात यह है कि सात राजकीय इंटर कॉलेज में से एक भी प्रधानाचार्य नहीं हैं। इसका असर छात्र संख्या पर पड़ रहा है। जब शिक्षक नहीं होंगे तो कोई पढ़ने क्यों आएगा? बिना शिक्षक पढ़ाई भी कैसी होगी?
जिले में सात राजकीय इंटर कॉलेज और 10 राजकीय हाईस्कूल हैं। 38 इंटर कॉलेज और 17 हाईस्कूल सरकार की तरफ से वित्त पोषित हैं। इन विद्यालयों में करीब दो लाख छात्र-छात्राओं का नामांकन है। सभी सरकारी कॉलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। सात राजकीय इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के सभी सात पद रिक्त हैं। हाईस्कूल में 10 प्रधानाध्यापक के पद के सापेक्ष सात पर ही तैनाती है। इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के 68 पद सृजित हैं, जिसमें से छह रिक्त हैं। सहायक अध्यापक के 155 सृजित पद में से 55 रिक्त हैं। वित्त पोषित 38 इंटर कॉलेजों में से 26 कॉलेजों में प्रधानाचार्य का पद रिक्त है। हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के 17 में से केवल चार पर तैनाती है, शेष 13 पद रिक्त हैं। प्रवक्ता के 283 में से 124 पद और सहायक अध्यापकों के 1016 में से 483 पद रिक्त हैं। सबसे अधिक संस्कृत, अंग्रेजी और विज्ञान वर्ग के पद रिक्त हैं। इससे विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। प्रधानाचार्य परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र मणि त्रिपाठी कहते हैं कि विद्यालयों से रिक्त पदों की सूचना प्रतिवर्ष जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को दी जाती है, लेकिन चयन बोर्ड को सही अधियाचना नहीं भेजी जाती, जिसके चलते पद रिक्त हैं। संवाद
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---कोट--
जिले के विद्यालयों में प्रधानाचार्य समेत अन्य शिक्षकों के सृजित पदों के सापेक्ष रिक्त पदों की सूचना चयन बोर्ड को भेजी गई है। बोर्ड की ओर से जिले को जो शिक्षक उपलब्ध होते हैं, उन्हें संबंधित कॉलेजों में भेजा जाता है। इस वर्ष भी कुछ शिक्षक मिले हैं, जिन्हें कॉलेज आवंटन कर दिया गया है। बोर्ड की तरफ से शिक्षक मिलने पर शेष रिक्त पदों के सापेक्ष विद्यालय आवंटित किए जाएंगे।
- उदय प्रकाश मिश्र, डीआईओएस
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