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आस्था संस्था के युवाओं ने की पहल, गांवों में कैम्प लगाकर दिया शिक्षा का मंत्र

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फोटो है।
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पहले दिया अक्षर ज्ञान, फिर 65 बच्चों का कराया नामांकन
- शिक्षा की अलख जगाने में जुटे युवकों को शुरुआत में झेलनी पड़ीं काफी कठिनाइयां
- घर वालों ने भी नहीं दिया था साथ, आज इनकी सफलता देख हैं गदगद

गंगेश्वर त्रिपाठी
पडरौना (कुशीनगर)। ‘माना अंधेरा घना है, पर दीया जलाना कहां मना है’...। जी हां, यदि कुछ कर गुजरने की ललक हो तो सफलता जरूर मिलती है। शहर की एक संस्था से जुड़े युवाओं ने इस बात को साबित कर दिया है। इन युवकों ने उन नौनिहालों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का मन बनाया, जो न स्कूल जाते थे और न उन्हें शब्दों का ज्ञान था। इसके लिए युवाओं ने नोनियापट्टी गांव में शिविर लगाकर 65 बच्चों में शिक्षा की अलख जगाई और अब अभिभावक बनकर परिषदीय विद्यालय में उनका नामांकन करा दिया है।
ऐसा नहीं है कि इन युवाओं की राह आसान रही। शुरुआत में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन जुनून के पक्के ये युवक अपने काम में लगे रहे। आरंभ में इनके घर वालों ने इनका साथ नहीं दिया, लेकिन अब वे इनकी कामयाबी देखकर गदगद हैं। ‘आस्था’ अ हेल्पिंग हैंड से जुड़े ये युवक हैं दीपक जायसवाल, कार्तिक सिंह, विशाल सिंह, विकास वर्मा, विजय शाह, राजन सोनी, अमन और सुधीर त्रिपाठी।
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इन्होंने मई में शहर से सटे गांव दलित बस्ती नोनियापट्टी में ‘संस्कारशाला’ शिविर लगाकर स्कूल न जाने वाले 65 बच्चों को पहले अनुशासन का पाठ पढ़ाया गया। बाद में अक्षर ज्ञान देना शुरू किया। दीपक जायसवाल ने बताया कि कुछ अभिभावक बच्चों को पढ़ने का मौका नहीं देते थे, उनसे बात की गई। इसके बाद वे बच्चों को पढ़ने के लिए भेजने को राजी हुए। इन बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित व विज्ञान समेत सामान्य ज्ञान की जानकारी दी गई। परिषदीय विद्यालय में नामांकन शुरू होते ही उनका नामांकन करा दिया गया। अब वे शाम को एक घंटे इन बच्चों को पढ़ाते हैं। युवकों के इस अभियान से बच्चे भी खुश हैं और अभिभावक भी। समाज के लोगों का भी नजरिया बदल गया है, वे इन युवकों को अब स्नेह और सम्मान की नजर से देखते हैं।
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