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मानसून सत्र शुरू, न रेनकट भरे गए और न रैटहोल्स

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तमकुहीरोड (कुशीनगर)। शुक्रवार से मानसून सत्र का आगाज हो गया है। इसी के साथ बड़ी गंडक नदी के जलस्तर में भी वृद्धि होने लगी है, लेकिन शासन प्रशासन की तरफ से ध्यान न देने के चलते एपी बांध पर न तो रेनकट व रैटहोल भरे गए हैं और न ही जर्जर स्परों की मरम्मत ही कराई जा सकी है। इसके चलते एपी बांध के साथ अलग-बगल के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
एपी तटबंध के किनारे बसे पिपराघाट, हनुमान टोला, जंगलीपट्टी, बिनटोली, घघवा जगदीश, चैनपट्टी, जवहीदयाल, बिरवट कोंहवलिया, बांकखास, बाघाचौर, डीहटोला, मदुरही, खैरखुटा, नोनियापट्टी, कचहरी टोला और अहिरौलीदान के लोगों की नींद उड़ चुकी है क्योंकि जो रैटहोल व रेनकट 2007 में एपी बांध के टूटने का कारण बने थे, उन्हें अब तक भरा नहीं गया। न ही जर्जर स्परों की मरम्मत कराई गई। यही नहीं जगह जगह हो रहे कटान से भी लोग भयभीत हैं।
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क्षेत्र के भाजपा नेता जेके सिंह, हीरालाल यादव, मथुरा सिंह, प्रभुनाथ यादव, जयप्रकाश निषाद, संजय सिंह, बबलू प्रसाद, अरविंद सिंह पटेल आदि का कहना है कि मानसून आने से पहले बाढ़ बचाव कार्य पूरा कर लेने के बड़े बड़े दावे किए गए थे, लेकिन सारे दावे खोखले साबित हुए हैं। क्योंकि जिन स्परों पर बांध की सुरक्षा निर्भर होती है, उनमें अधिकांश अभी तक जर्जर हालत में है। किसी किसी की लंबाई तो मात्र 40-50 मीटर ही रह गई है, जबकि निर्माण के समय इनकी लंबाई 250 से 300 मीटर हुआ करती थी।
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इन लोगों का यह भी कहना है कि बाढ़खंड अभी धन की कमी का बताने में लगा है। इस कारण क्षेत्र के लोगों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। इन लोगों का कहना है कि जब तक बोल्डर से कटान रोकने और स्पर व बांध को बचाने का कार्य शुरू नहीं होगा, तब तक बाढ़ की तबाही को रोकना मुश्किल होगा। इस संबंध में बाढ़खंड के एक्सईएन रतराम का कहना है कि पूरे बांध पर चौकसी बढ़ा दी गई है। बचाव से जुड़े सभी प्रयास किए जाएंगे।
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