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सामान की किल्लत से बढ़ रही है वितरण व्यवस्था की दिक्कतें

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कुशीनगर। विद्युत वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाने में सबसे बड़ा संकट तार, पोल व ट्रांसफार्मर का ही है। जले ट्रांसफार्मर 24 घंटे तो क्या हफ्ते भर बाद भी नहीं बदले जा रहे हैं। यही स्थिति टूटे तार व पोल की है। उपभोक्ता दौड़ते-दौड़ते थक जा रहे हैं, लेकिन अफसरों पर इसका असर नहीं पड़ रहा है। ट्रांसफार्मर के लिए पडरौना से गोरखपुर तक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। पडरौना नगर के कठकुइयां मोड़ व हास्पीटल रोड पर 400 केवीए का ट्रांसफार्मर कई दिन से जला हुआ है। परंतु इसे अभी तक बदला नहीं गया है।
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कसया कस्बे से सटे पिपरहिया गांव स्थित ओवरहेड टैंक का ट्रांसफार्मर करीब एक पखवारा पहले जल गया। इस टैंक से कसया कस्बे के कई मुहल्लों को जलापूर्ति होती है। दिक्कत आने पर वहां वैकल्पिक ट्रांसफार्मर लगा दिया गया, लेकिन जला ट्रांसफार्मर अब तक नहीं बदला गया। शहर में दूसरा कोई ट्रांसफार्मर जल जाए तो विभाग के पास कोई विकल्प नहीं है। कसया उपकेंद्र से जुड़े सिरसिया खोहिया गांव का भी ट्रांसफार्मर कई दिन से जला है, लेकिन उपकेंद्र में ट्रांसफार्मर है नहीं। परेशान उपभोक्ता पडरौना स्टोर से संपर्क करते हैं। कई बार यहां भी नहीं मिलता है तो इन सामानों के लिए गोरखपुर जाना पड़ता है।
विद्युत विभाग के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बिजली आपूर्ति की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए हर उपकेंद्र पर एडवांस में कम से कम पांच हजार मीटर तार, एक दर्जन ट्रांसफार्मर तथा कुछ अतिरिक्त पोल जरूर होने चाहिए। जिससे कि जरूरत पड़ने पर तुरंत इसकी मदद से आपूर्ति सुचारु बनाए रखा जा सके। परंतु यहां स्थिति यह है कि टूट गए तार को ही किसी तरह से दुबारा जोड़ा जाता है। जले ट्रांसफार्मर के लिए तो उपभोक्ताओं को कई-कई दिन तक चक्कर काटना पड़ता है। वहीं स्टोर इंचार्ज आरके राव का कहना है कि उनके यहां किसी विद्युत उपकेंद्र से ट्रांसफार्मर की डिमांड नहीं की गई है। किसी एसडीओ ने इस तरह की कोई सूचना भी नहीं दी है। उपलब्धता के आधार पर सामान भेजा जाता है।
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