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विश्व शांति के लिए बौद्ध भिक्षुओं ने किया शांति पाठ

Sat, 10 Nov 2018 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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कुशीनगर महापरिनिर्वाण मंदिर में तृतीय इंटरनेशनल त्रिपिटक चांटिंग में विश्व शांति को सूत्रपाठ करते विभिन्न देशों के बोद्ध अनुयायी। - फोटो : अमर उजाला
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कसया (कुशीनगर)। कुशीनगर स्थित महापरिनिर्वाण बुद्ध मंदिर परिसर में शनिवार को तीन दिवसीय तृतीय इंटरनेशनल त्रिपिटक चांटिंग समारोह शुरू हो गया। डीएम डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कैंडल जलाकर का शुभारंभ किया। उन्होंने भगवान बुद्ध को विष्णु भगवान का अवतार बताया। समारोह को भव्य रूप देने में अंतर्राष्ट्रीय त्रिपिटक चांटिंग काउंसिल और कुशीनगर त्रिपिटक चांटिंग काउंसिल कोई कसर नहीं छोड़ा है।
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डीएम ने कहा कि हम भगवान बुद्ध के बताए मध्यम मार्ग, त्रिरत्न, पंचशील व अष्टांगिक मार्ग का अनुसरण करते हैं। उन्होंने कहा कि बुद्ध के बताए मार्ग का अनुसरण कर विश्व में शांति की स्थापना की जा सकती है। डीएम ने तत्पश्चात विश्व शांति का घंटा बजाकर मंगलकामना की।

इसके बाद विश्व शांति के लिए सूत्रपाठ शुरू हुआ। विशेष पाठ के बाद भोजनावकाश हो गया। फिर दोपहर बाद एक बजे से शाम तीन बजे तक बौद्ध भिक्षुओं ने लयबद्ध स्वर में सूत्रपाठ कर विश्व में शांति की स्थापना की कामना की। वहीं इंटरनेशनल त्रिपिटक चांटिंग काउंसिल की प्रतिनिधित्व कर रही वांग्से डिक्से ने अपना संबोधन अंग्रेजी में दिया। कहा कि त्रिपिटक बौद्ध धर्म का पवित्र ग्रंथ है। इसमें बताए गए उपदेशों पर चलकर शांति, करुणा और प्रेम का संदेश दिया जा सकता है।
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इसके पूर्व म्यांमार बुद्ध विहार से बौद्ध अनुयायियों ने शांति जुलूस निकाला। जुलूस म्यांमार बुद्ध विहार से शुरू होकर बुद्ध मार्ग स्थित मुख्य गेट की परिक्रमा कर वापस महापरिनिर्वाण मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंचा। वहां पर जुलूस की अगुवाई कर रहे भिक्षु संघ अध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर ट्राई साइकिल से चांटिंग समारोह स्थल पर पहुंचे। उनके पीछे विभिन्न देशों के बौद्ध अनुयायी भी भ्रमण कर रह थे। जुलुस में स्कूली छात्राओं भी सम्मिलित हुईं।

अध्यक्षता कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर और संचालन अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष भंते नंदरतन व आयोजन समिति के सदस्य टीके राय ने किया।
इस मौके पर भदंत ज्ञानेश्वर बुद्ध विहार के प्रबंधक भंते महेंद्र, भंते शीलप्रकाश, थाई मंदिर के भंते सोक्रांन, भंते चंदिमा, भंते गौतम, रंजन कुमार, नगीना,प् रेमचंद वर्मा आदि शामिल रहे।

आर्ट ऑफ लीविंग ने ज्ञानेश्वर को ओढ़ाया शाल
कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर को उनके 83वें जन्मदिन पर आर्ट ऑफ लीविंग के जिला संयोजक राजेश अग्रवाल की अगुवाई में शाल ओढ़ाकर दीर्घायु होने की मंगलकामना की गई।

17 देशों के बौद्ध अनुयायियों ने किया प्रतिभाग
भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में चलने वाले तीन दिवसीय इंटरनेशनल त्रिपिटक चांटिंग समारोह में 17 देशों के बौद्ध अनुयायी अपनी सहभागिता निभा रहे हैं। उनकी ओर से इस समारोह में शामिल होकर शोभा बढ़ाई जा रही है। इनमें वियतनाम, लाओस, मलेशिया, श्रीलंका, जापान, इंडोनेशिया, चीन, तिब्बत, थाइलैंड, अमेरिका, भूटान, नेपाल, वर्मा, कंबोडिया, ताईवान के लगभग 600 बौद्ध अनुयायी शामिल हो रहे हैं।

यह है त्रिपिटक
अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष भंते नंदरतन ने बताया कि त्रिपिटक का शाब्दिक अर्थ (तीन पिटारी) जो बौद्ध धर्म का प्रमुख ग्रंथ है। इसे सभी बौद्ध संप्रदाय महायान, थेरवाद, बज्रयान, नवयान आदि मानते हैं। उन्होंने कहा कि यह बौद्ध धर्म का प्राचीनतम ग्रंथ है। इसमें भगवान बुद्ध के उपदेश संकलित हैं। यह ग्रंथ पालि भाषा में लिखा गया है। इसमें भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति से महापरिनिर्वाण तक के प्रवचनों और उपदेशों को संग्रहित किया गया है। भंते ने इस ग्रंथ का रचनाकाल ईसा पूर्व 100 से ईसा पूर्व 500 तक बताया।
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