पुरानी पेंशन नीति की बहाली को भरी हुंकार
कर्मचारियों ने धरने के माध्यम से दिखाई ताकत
प्रदर्शनकारियों ने बताया पेंशन को बुढ़ापे का आधार
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। कलेक्ट्रेट गेट के सामने बृहस्पतिवार को कर्मचारियों, शिक्षकों व अधिकारियों ने पुरानी पेंशन नीति बहाल कराने के लिए धरना दिया। कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच की तरफ से आयोजित प्रदर्शन में पुरानी पेंशन नीति को बुढ़ापे का आधार बता कर फिर से लागू कराने की मांग की गई। इसके बाद मांगों के समर्थन में सीएम को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंप कर शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई।
मंच के जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह की अगुवाई में विभिन्न विभागों के कर्मचारी सुबह दस बजे कलेक्ट्रेट के पास पहुंचे और यहां धरना देकर प्रदर्शन करने लगे। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह ने कहा कि मांगें पूरी नहीं की गईं तो बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। शासकीय कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद़ जीवन यापन करने के लिए पेंशन ही एक मात्र सहारा है। नई अंशदायी पेंशन योजना के तहत आने वाले कर्मचारियों को चिंता है कि उनकी जमा धनराशी शेयर बाजार में निवेश कर दी जा रही है। इससे निश्चित कोई आय की गारंटी नही है। ऐसे में जीवन भर सरकारी सेवा करने के बाद अनिश्चितता का जीवन जीना खेद की बाद है। कर्मचारी राजेश तिवारी, अनूप सिंह, सत्यजीत द्विवेदी, हरिश्चंद्र मिश्र, शिवांगी मिश्रा, संदीप कुमार राय, संजय मिश्र, मोहन वर्मा, अरुणेंद्र राय, मेहरुद्दीन, नीरज श्रीवास्तव, श्रीकृष्ण सिंह, सुरेश रावत, श्रुति दूबे, ब्रजभूषण पांडेय ने भी लोगों को संबोधित कर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कराने की मांग की। इसके बाद पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम को दिया गया।
इस दौरान राजेंद्र सिंह, कमलदानी, छेदी प्रसाद, अमिताभ त्रिपाठी, दिलीप पांडेय, रविंद्र पांडेय, भगवंत राजभर, शरद गुप्ता, आलोक शाही, शंभू यादव, विद्या सागर पांडेय, रमाकांत गुप्ता, सीपी दूबे, राकेश पांडेय, दीनबंधु मद्धेशिया, सुनील पांडेय, सुशील, नीलम सिंह, धर्म प्रकाश पाठक, रामदिनेश सिंह, अमित श्रीवास्तव, अमित तिवारी, चंद्रलेखा वर्मा, संध्या तिवारी, राजेश सिंह, आलोक श्रीवास्तव, विनोद तिवारी, अविनाश शुक्ल आदि कर्मचारी मौजूद रहे।
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परीचर्चा
- विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेल्फेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ल ने कहा कि पेंशन बुढ़ापे का आधार है। इसे वापस लेने के लिए जो कुर्बानी देनी होगी दी जाएगी।
- राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष प्रभुनंद उपाध्याय ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को पेंशन यदि दिया जा सकता है, तो जीवन भर सरकारी सेवा करने वाले कर्मचारियों को इस व्यवस्था से क्यों वंचित किया जा रहा है।
- लेखपाल संघ के महामंत्री निलेश रंजन राव ने कहा कि सरकारी सेवा से अवकाश प्राप्त करने के बाद पेंशन ही कर्मचारियों के लिए जीवन यापन करने का आधार होता है। इसके बिना बुढ़ापा काटना मुश्किल हो जाएगा।
- शिक्षक अंजना पांडेय ने कहा कि वर्ष 2013 में गोरखपुर के सांसद रहने के दौरान मुख्यमंत्री ने पुरानी पेंशन बहाली की वकालत की थी। अब तो उन्हीं की सरकार है। ऐसे में कर्मचारियों के साथ न्याय होने की उम्मीद है।