कुशीनगर। मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री के सख्त तेवर और डीएम की हनक भी जिले की बदहाल बिजली व्यवस्था को नहीं सुधार पा रही है। सबसे खराब हालत जले ट्रांसफार्मरों की है। 48 घंटे के भीतर जले ट्रांसफार्मर बदलने के आदेश की हकीकत यह है कि कई जगह महीने भर बाद भी जले ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे हैं। बिजली विभाग के अफसरों के प्रति लोगों के मन में इतना गुस्सा है कि कभी भी जिले में कानून व्यवस्था के लिए संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।
कुशीनगर जिले में बिजली वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बसपा सरकार में ही जिले को दो हिस्सों में बांटकर कसया व पडरौना को अलग-अगल डिवीजन बनाया गया। करीब ढाई लाख उपभोक्ताओं वाले इस जिले में बिजली आपूर्ति की स्थिति बेहद खराब है। सबसे बड़ा संकट जले ट्रांसफार्मरों को बदलने को लेकर है। पडरौना विद्युत उपकेंद्र परिसर में ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग वर्कशाप है। ट्रांसफार्मरों की लोडिंग-अनलोडिंग का ठेका भी है। परंतु जले ट्रांसफार्मर तभी बदले जाते हैं, जब उपभोक्ता खुद प्रयास करें और इसके लिए विभाग की तरफ से की जाने वाली डिमांड को पूरा करें। स्थिति की विकटता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला मुख्यालय के समीप सरस्वती चौक का ट्रांसफार्मर एक सप्ताह बाद भी नहीं बदला गया। जटहां बाजार क्षेत्र के जरार गांव में तीन माह से ट्रांसफार्मर जला हुआ है। इसी गांव के एक टोले का ट्रांसफार्मर तो छह महीने बाद भी नहीं बदला गया। गांव वालों का आरोप है कि ट्रांसफार्मर बदलने के लिए पांच हजार रुपये की मांग की जा रही है। सेवरही कस्बे के जानकी नगर मुहल्ले में एक माह बाद भी जला ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया।
दुदही क्षेत्र में अमवा खास टोला बरवापट्टी का ट्रांसफार्मर एक माह से अधिक समय से जला है। गौरीश्रीराम गांव का पांच दिन और लोहरपट्टी का ट्रांसफार्मर एक सप्ताह से जला है।
फाजिलनगर क्षेत्र के सुमही बुजुर्ग, देवी चक, लछिया खास, भठही और गड़हिया का ट्रांसफार्मर भी कई दिन से जला हुआ है। सुकरौली क्षेत्र के बढया बुजुर्ग के देऊर टोला का ट्रांसफार्मर भी 10 दिन से खराब पड़ा है। इसके अलावा मिश्रौली गांव का ट्रांसफार्मर भी एक सप्ताह से खराब है।
इस संबंध में एक्सईएन संजय यादव का कहना है कि डिमांड के अनुरूप वर्कशाप से ट्रांसफार्मर नहीं मिल पा रहे हैं, इसकी वजह से दिक्कत आ रही है। उपलब्धता के आधार पर ट्रांसफार्मर बदले जा रहे हैं।
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डीएम का भी नहीं हो रहा असर
पडरौना। मातहत अफसरों को हड़काकर काम कराने में यकीन रखने वाले डीएम आंद्रा वामसी ने बिजली व्यवस्था सुधारने का प्रयास तो बहुत किया लेकिन उनकी हनक का इस विभाग के अफसरों पर कोई असर नहीं दिखा। अफसरों की कार्यशैली सुधारने के लिए डीएम ने देर रात और अल सुबह बैठकें बुलाईं। अफसरों ने वादे तो जरूर किए लेकिन उन पर कभी अमल नहीं किया।