कुशीनगर। स्वच्छ भारत का सपना देखने वाली भाजपा की केंद्र सरकार की मंशा पर ग्राम पंचायतों के कुछ जिम्मेदारों ने ही पानी फेर दिया है। खुद पंचायतीराज विभाग ही मानता है कि दो वित्तीय वर्षों में जनपद को करीब 41 हजार शौचालयों के मद में मिली धनराशि का कई गांवों के ग्राम प्रधानों और सचिवों ने उपयोग ही नहीं किया। यहां तक कि ग्राम प्रधानों व सचिवों ने न तो शौचालय पूर्ण कराए और न ही उसका उपभोग प्रमाण पत्र ही प्रस्तुत किया है। विभाग ने अब संबंधित प्रधानों व पंचायत सचिवों को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में उपभोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा है। उपभोग प्रमाण प्रस्तुत नहीं करने वालों से रिकवरी की तैयारी भी की जा रही है।
भारत सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच से मुक्ति के लिए घर-घर शौचालय बनवा रही है। सरकार की मंशा हर घर में शौचालय बनवाने की है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इस मद में भेजी गई रकम से कई गांवों के जिम्मेदारों ने शौचालय बनवाए ही नहीं। पंचायतीराज विभाग की मानी जाए तो वित्तीय वर्ष 2015-16 के 10925 और 2016-17 के करीब 30 हजार शौचालयों के लिए 12 हजार रुपये की दर से कुल लगभग 59.11 करोड़ रुपये शासन की ओर से भेजे गए थे। इनमें वित्तीय वर्ष 2015-16 के 250 और 2016-17 के 1112 शौचालय अब भी अपूर्ण हैं। इन ग्राम पंचायतों के प्रधानों और सचिवों ने इनका उपभोग प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया। इस हिसाब से करीब एक करोड़ तिरसठ लाख चौव्वालिस हजार रुपये का काम अब भी पूर्ण होना बाकी है। इस संबंध में डीपीआरओ राघवेंद्र कुमार द्विवेदी का कहना है कि इस तरह की मनमानी गबन की श्रेणी में आती है। दोनों वित्तीय वर्ष बीतने के बाद भी ग्राम प्रधानों और सचिवों ने उपभोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया। शौचालय पूर्ण कराकर उपभोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत न करने वाले सभी ग्राम प्रधानों और सचिवों को नोटिस भेजी गई है। जिसमें एक सप्ताह में उपभोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया है। अगर वे उपभोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करते हैं तो उनसे शौचालय के मद में आवंटित पूरी धनराशि की रिकवरी कराई जाएगी।