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जिला मुख्यालय पर ही खराब है स्वच्छता की स्थिति

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कुशीनगर। घर-घर शौचालय बनवाने के लिए सरकार और जिला प्रशासन की ओर से पूरा जोर लगाया गया है। शासन इस मद में करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। लोगों को खुले में शौच नहीं करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। परंतु जिला मुख्यालय पर आए फरियादियों के लिए ही कोई इंतजाम नहीं है। कलेक्ट्रेट व जिला अस्पताल परिसर में आए लोगों को जरूरत पड़ने पर परेशान होना पड़ता है।
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शहर से पांच किलोमीटर दूर रविंद्र नगर जिला मुख्यालय पर अब लगभग सभी विभागों के दफ्तर बन चुके हैं। हर दिन यहां पांच हजार से ज्यादा लोग किसी न किसी वजह से आते-जाते हैं। केवल संयुक्त जिला चिकित्सालय में ही 1200 से 1500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों की संख्या भी 500 से ज्यादा रहती है। पहले परिसर में एक सार्वजनिक शौचालय बना था, लेकिन उपयोग शुरू होने से पहले ही उसे तोड़ दिया गया और अब उस जगह पर महिला अस्पताल का भवन बन रहा है।
यही हाल कलेक्ट्रेट परिसर का है। इस भवन में डीएम ऑफिस व न्यायालय समेत एक दर्जन विभागों का दफ्तर है। सुबह से शाम तक फरियादियों की भीड़ रहती है। परिसर में एक सार्वजनिक शौचालय तो बना है लेकिन निर्माण के बाद से ही उस पर ताला लगा हुआ है। इस परिसर में कुछ और शौचालय भी हैं, लेकिन उनमें भी हमेशा ताला बंद रहता है। शोभा छपरा के मनीष कुशवाहा और पिपरा खुर्द के जागमन कहते हैं कि परिसर में शौचालय पर ताला लगे होने के कारण काफी दिक्कत होती है। लोगों को परिसर से बाहर जगह तलाश करनी पड़ती है। विशुनपट्टी के कैलाश व नादह गांव के छट्ठू गुप्ता कहते हैं कि एक तरफ शौचालय के उपयोग की जानकारी के लिए प्रशासन गांव-गांव अभियान चला रहा है और दूसरी ओर कलेक्ट्रेट परिसर में ही शौचालय बंद रहते हैं। मजबूरी में लोग झाड़ियों और दिवारों की आड़ में अपनी जरूरत के लिए जाते हैं।
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