पडरौना। जिला अस्पताल के वार्ड डायरिया के मरीजों से भरे पड़े हैं। आलम यह है कि 100 बेड के इस अस्पताल में डायरिया सहित विभिन्न रोगों के 200 से अधिक मरीज भर्ती थे। मरीजों की भीड़ को देखते हुए 35 अतिरिक्त बेड लगाए गए थे।
इन दिनों जिला अस्पताल में डायरिया और वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों के आने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इस अस्पताल में एक बेड पर दो से तीन मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। हालत यह है कि अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों के बैठने की भी जगह नहीं रह गई है।
मंगलवार को जिला अस्पताल में डॉक्टरों के कक्ष से लेकर पर्ची व दवा काउंटर पर मरीज और उनके घरवाले लाइन लगाए खड़े थे। वार्ड में भर्ती डायरिया से पीड़ित मरीजों में रामनगर की कलावती उम्र 60 वर्ष, कटाईभरपुरवा की जुबैदा 35 वर्ष, अन्हारीबारी की मालती 35 वर्ष, बिंदवलिया की धरनी देवी 55 वर्ष, बेलवा की रीमा 24 वर्ष, अन्हारीबारी के सीताराम 65 वर्ष, तुर्कपट्टी के हनुमंत 32 वर्ष, कसया की खुशबु 35 वर्ष, तुर्कपट्टी की साबेया 04 माह, पवन 4 वर्ष, रामकोला के आफताब 2 वर्ष, विशुनपुरा के आदित्य 2 वर्ष सहित कई मरीजों का इलाज चल रहा था।
इमरजेंसी वार्ड से लेकर प्राइवेट वार्ड भी मरीजों से भरा पड़ा है। मरीजों की भीड़ अधिक होने के चलते जिसे जहां जगह मिली, उसका इलाज वहीं पर शुरू हो जाता था।
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सीएचसी-पीएचसी से रेफर कर दिए जा रहे सामान्य मरीज
जिला अस्पताल में क्षमता से अधिक मरीजों के इलाज की विवशता इस वजह से भी है कि सीएचसी और पीएचसी से मामूली बुखार व उल्टी-दस्त के सामान्य रोगियों को भी रेफर कर दिया जा रहा है। यह बात अस्पताल के जिम्मेदारों से लेकर स्वास्थ्यकर्मी और मरीजों के घरवाले भी स्वीकार करते हैं। उनका कहना है कि बुखार और उल्टी-दस्त के रोगियों को भी सीधे जिला अस्पताल की राह दिखा दी जा रही है, जिसे सीएचसी-पीएचसी पर आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
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कालाजार से पीड़ित मासूम
पडरौना ब्लॉक के नाहरछपरा निवासी हेमंत मुसहर की छह वर्षीय पुत्री आरती कालाजार से पीड़ित है। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह बच्ची कुछ दिन पहले भी कालाजार की चपेट में आने के कारण जिला अस्पताल में भर्ती कराई गई थी, जहां ठीक होने के बाद डॉक्टर ने घर भेज दिया था। नाहर छपरा गांव के ही निवासी अंबिका की 40 वर्षीय पत्नी उर्मिला कालाजार की चपेट में आने के कारण तीन अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराई गई थीं। उससे पहले उनकी 12 वर्षीय बेटी तेतरी भी जुलाई में कालाजार से पीड़ित होने पर भर्ती थी। इन सबका इलाज होने पर ठीक होने के बाद घर भेजा गया था। इस तरह कालाजार के मामले में यह गांव काफी संवेदनशील है।
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100 बेड का अस्पताल है और 150 से अधिक मरीज आ रहे हैं। सीएचसी-पीएचसी में सामान्य रोगियों का भी इलाज करने की बजाय उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। इसलिए वर्कलोड बढ़ गया है। किसी तरह मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
-डॉ. लालता प्रसाद, सीएमएस, जिला अस्पताल।