कसया। जनता की स्वतंत्रता उस देश के स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान होती है, लेकिन 43 वर्ष पूर्व 1975 में इंदिरा सरकार ने देश में इमरजेंसी लागू कर लोकतंत्र के इतिहास में धब्बा लगाने का कार्य किया था। इसे देश की जनता कभी भूल नहीं पाएगी।
ये बातें प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कहीं। वे सोमवार को बुद्ध पीजी कॉलेज के सभागार में लोकतंत्र रक्षक सेनानियों की तरफ से आयोजित काला दिवस (धिक्कार दिवस) कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोकतंत्र के इतिहास में इमरजेंसी को काला अध्याय बताते हुए कहा कि राजनारायण, जयप्रकाश नारायण, पीलू मोदी, चंद्रशेखर, मधुलिमये, रवि रे आदि विरोधी दल के बड़े नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया था। लोकबंधु राजनारायण की रिट पर श्रीमती इंदिरा गांधी चुनाव हार गई और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन सिन्हा ने इंदिरा को छह साल के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। उस समय इंदिरा गांधी को त्याग पत्र देना पड़ा था। कार्यक्रम को कुशीनगर के विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी, फाजिलगनर के विधायक गंगा सिंह कुशवाहा, केशव पाठक आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश शाही और संचालन सुमित त्रिपाठी ने किया। अंत में लोकतंत्र रक्षक सेनानी ज्ञानेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों के प्रति अभार ज्ञापित किया। इस मौके पर क्षेत्रीय महामंत्री डाक्टर जितेंद्र प्रताप राव, जिला मीडिया प्रभारी मारकंडेय शाही, कसया मंडल अध्यक्ष डॉक्टर टीएन राव, संतोष सिंह, पूर्व चेयरमैन कृष्ण कुमार, व्यास दुबे, रामधनी, रामआसरे पांडेय, रमाशंकर शर्मा, जयप्रकाश यादव, नरसिंह, रामदेव सिंह, हरीशचंद, विंध्याचल, कुशभगत, योगेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर में लोकतंत्र रक्षक सेनानियों की तरफ से आयोजित काला दिवस के इस कार्यक्रम में कुशीनगर के 85 और देवरिया जिले 57 लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधायक रजनीकांत मणि और जिलाध्यक्ष जयप्रकाश शाही आदि ने अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। इनमें अधिवक्ता जयप्रकाश वर्मा, रमजान अली, प्रेमनारायन लाल, ओमप्रकाश यादव, ओमप्रकाश शर्मा, ओमप्रकाश सिंह, सुबाषचंद उपाध्याय, तैयब अंसारी, विश्वनाथ, चंदीलाल, ब्रह्म उपाध्याय, दीनानाथ वर्मा, जयनरायन तिवारी, सुरेंद्र प्रसाद बर्नवाल, रामराज, राजाराम गुप्ता, रामधनी, झिनकू आदि शामिल रहे।