महिला अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर होगी डॉक्टरों की नियुक्ति
- 19.98 करोड़ की लागत से बना रहा हॉस्पीटल, अंतिम चरण में है निर्माण कार्य
राकेश कुमार गौंड़
पडरौना। सब कुछ ठीक रहा तो आधी आबादी के लिए जनपद मुख्यालय पर बन रहा 100 बेड का मॉडल मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ विंग स्वास्थ्य विभाग को तीन महीने में हैंडओवर हो जाएगा। अभी थर्ड फेज की ऑडिट हो रही है। इसके पूरा होते ही अस्पताल के हैंडओवर होने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके बाद अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, विशेषज्ञ महिला डॉक्टरों एवं पीडियाट्रिशियन सहित पैरामेडिकल स्टॉफ की नियुक्ति की जाएगी। एचआईएमएस की तरफ से इनकी नियुक्ति पीपीपी मॉडल पर की जाएगी।
संयुक्त जिला चिकित्सालय के पास 100 बेड के एमएमसीएच (मॉडल मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ) विंग का निर्माण कराया जा रहा है। इसकी लागत 19.98 करोड़ रुपये है। पांच मंजिले इस अस्पताल का निर्माण राजकीय निर्माण निगम ने जून 2015 में शुरू किया था। इसे फरवरी 2017 में पूरा कर स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर देना था, लेकिन तय समय में अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसके बाद कार्यदायी संस्था को 31 दिसंबर तक की मोहलत दी गई थी। फिर भी अस्पताल अभी तक हैंडओवर नहीं हो सका। अस्पताल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
स्वास्थ्य विभाग की माने तो अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और विशेषज्ञ डॉक्टर, बाल रोग विशेषज्ञ, ईएमओ, फार्मासिस्ट, स्टॉफ नर्स सहित अन्य स्टॉफ की नियुक्ति निजी संस्था के माध्यम से की जाएगी। यह नियुक्ति हॉस्पीटल इंफारर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (एचआईएमएस) की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर की जाएगी।
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महिलाओं के इलाज का समुचित इंतजाम नहीं
- 36 लाख की आबादी वाले इस जिले में महिलाओं के इलाज का समुचित इंतजाम नहीं है। यहां के जिला अस्पताल में तीन तथा सीएमओ के अधीन आने वाले सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 13 महिला डॉक्टर तैनात हैं। दिन के दो बजे के बाद इन अस्पतालों में महिला डॉक्टरों का मिलना मुश्किल है। इस वजह से प्रसव संबंधी इलाज के लिए महिलाओं को ज्यादातर प्राइवेट नर्सिंग होम पर निर्भर रहना पड़ता है।
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कोट---
- जनपद मुख्यालय पर बन रहे 100 बेड के मैटर्निटी विंग का निर्माण अंतिम चरण में है। इसके थर्ड फेज की आडिट चल रही है। इसके बाद अस्पताल के हैंडओवर होने का रास्ता साफ हो जाएगा। उम्मीद है कि तीन महीने में अस्पताल हैंडओवर हो जाए। इसमें सीएमएस और विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित पैरामेडिकल स्टॉफ की नियुक्ति पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर की जाएगी।
- डॉ. हरिचरण, मुख्य चिकित्साधिकारी