भारत सरकार ने दूध की गुणवत्ता को लेकर एक मानक तय किया है। इसके अनुसार वर्तमान में समितियों से संग्रहीत दूध में वह मानक उपलब्ध नहीं है। मानक के अनुसार दूध का एसएनएफ (साॅलिड नाट फैट) 8.30 प्रतिशत होना तय है, लेकिन समितियों से संग्रहीत दूध का साॅलिड नाट फैट 7.80 प्रतिशत ही पाया जा रहा है।
इसके चलते पराग डेयरी गोरखपुर केंद्र से समितियों का दूध अस्वीकृत कर दिया जा रहा है। साॅलिड नाट फैट के तहत दूध में कैल्शियम, मैग्नीज, कार्बोहाइड्रेट के अलावा वसा होती है। हालांकि, दूध में 85 प्रतिशत पानी होता है। कंपनी साॅलिड नाट फैट का ही पैसा देती है।
प्रभारी प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मानक के अनुसार समितियाें से दूध की आपूर्ति करने पर अवशीतन केंद्र का संचालन फिर आरंभ किया जाएगा। अभी बंद है। जल्द ही समाधान होगा।
दुग्ध समिति सचिव बोले
पूर्व में 30-35 लीटर दूध अवशीतन केंद्र कसया को आपूर्ति करते रहे। बीते सितंबर महीने से 5-10 लीटर दूध ही दे रहे थे। अवशीतन केंद्र पर दूध का एसएनएफ कम बताकर 20-22 रुपये लीटर ही दूध का दाम दिया जा रहा था। पूर्व में 11 गायें दूध उत्पादन के लिए पालन किया था। अब सिर्फ चार गायें ही पाले हैं। वर्तमान में 20 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। बकाया करीब 22 हजार रुपये होगा।
-सतीश सिंह, होरलापुर, दुग्ध समिति सचिव।
सात महीने के दूध की बिक्री की एक लाख रुपये की रकम नहीं मिली है। वर्तमान में 40-50 लीटर दूध का उत्पादन करते हैं, लेकिन पराग डेयरी के भुगतान नहीं करने से अब सिर्फ 10 लीटर ही आपूर्ति हो रही थी। जल्द अवशीतन केंद्र के चलने की उम्मीद है।
-नथुनी कुशवाहा, दुग्ध समिति सचिव, चौबिया पटखौली, दुदही
कसया दुग्ध अवशीतन केंद्र बंद होने से परेशानी बढ़ी है। वर्तमान में नौ गायों का पालन किए हैं। इससे करीब 40-50 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, लेकिन छह महीने से केंद्र को भेजे गए दूध की 50 हजार रुपये की रकम नहीं मिली है। कोई बेहतर विकल्प भी नहीं है।
-घनश्याम पांडेय, धौरहरा, फाजिलनगर, सचिव दुग्ध समिति
फरवरी महीने से कसया दुग्ध अवशीतन केंद्र को दूध की आपूर्ति बंद कर दी है। इसकी वजह समय से मूल्य का भुगतान न करना है। पहले कामकाज ठीक था। 10-15 लीटर दूध की आपूर्ति करते रहे हैं। वर्तमान में 15 गायों के करीब 40-50 लीटर दूध की गांव में बिक्री हो जा रही है।
-घनश्याम कुशवाहा, विशुनपुरा, दुग्ध समिति सचिव