गोरखपुर के जानीपुर के प्रदीप उर्फ सोनू पाठक ने बताया कि मेरा परिवार चार दशक से पराग डेयरी को दूध की आपूर्ति कर रहा है। कारखाना बंद हो जाने से भविष्य को लेकर चिंतित हूं। भूपगढ़ गगहा के पशुपालक करुणेश कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि वर्षों से पराग डेयरी को दूध की आपूर्ति कर रहे हैं। डेयरी बंद होने से परेशान हूं। दूध का मेरा 55 हजार रुपये बकाया है। मेरे 25 लीटर दूध को मानक के विपरीत बताकर 20 जून को फेंक दिया गया था।
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डेयरी के चेयरमैन डाॅ. रणजीत सिंह डेयरी को बंद करना किसानों के साथ अन्याय है। मैं दुग्ध संघ संचालक मंडल का चेयरमैन हूं, लेकिन डेयरी बंद करने के विषय में संचालक मंडल से कोई चर्चा नहीं की गई, जो न्यायसंगत नहीं है।
पीसीडीएफ प्रबंध निदेशक, कुणाल सिल्कू ने कहा कि मामला जीएम और चेयरमैन के स्तर का है। उन्होंने ने ही निर्णय लिया है। वैसे डेयरी वर्षों से घाटे में चल रही थी, जिसे बंद कर दिया गया है। डेयरी पर करोड़ों रुपये का बकाया है। पशुपालकों से दूध लेकर अयोध्या भेजा जा रहा है। वहां से तैयार उत्पाद लाकर बेचा जा रहा है।
डेयरी के कर्मचारी
दुग्ध संघ -22
पीसीडीएफ -1
संविदा पर मिनी सिक्योरिटी -40
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डेयरी पर बकाया राशि
मिनी सिक्योरिटी का 50 लाख
कर्मचारियों का डेढ़ करोड़
स्टीम कंपनी का 15 लाख
ट्रांसपोर्टरों का 60 लाख
स्टेट मिल्क एसएमजी का डेढ़ करोड़
दुग्ध उत्पादकों का दो करोड़ रुपये
कुल बकाया करीब 6.25 करोड़