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गोरखपुर की पराग डेयरी बंद: चार जिलों के दुग्ध उत्पादकों में हड़कंप, देवरिया में प्रदर्शन

Thu, 22 Jun 2023 10:28 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गीडा (गोरखपुर)/देवरिया।

सार

भूपगढ़ गगहा के पशुपालक करुणेश कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि वर्षों से पराग डेयरी को दूध की आपूर्ति कर रहे हैं। डेयरी बंद होने से परेशान हूं। दूध का मेरा 55 हजार रुपये बकाया है। मेरे 25 लीटर दूध को मानक के विपरीत बताकर 20 जून को फेंक दिया गया था।
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गोरखपुर पराग डेयरी - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में घाटे में चल रहे पराग डेयरी के कारखाने को एक जून से बंद कर दिया गया है। दूध नहीं खरीदे जाने से दशकों से दूध की आपूर्ति करने वाले पशुपालकों में हड़कंप की स्थिति है। बुधवार को देवरिया में पशुपालकों ने सड़क पर दूध बहाकर विरोध प्रदर्शन किया है। हालांकि, पराग डेयरी के अधिकारियों का दावा है कि पशुपालकों से दूध खरीदकर अयोध्या के प्लांट में भेजा जा रहा है।

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बताया जा रहा है कि गोरखपुर की पराग डेयरी के कारखाने पर विभिन्न मदों में 6.25 करोड़ रुपये की देनदारी है। केवल पशुपालकों का ही दो करोड़ रुपये बकाया है। जबकि कर्मचारियों का डेढ़ करोड़ रुपये बकाया है। डेयरी में मंडल के चारों जिलों गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के दुग्ध उत्पादकों का दूध खरीदा जाता था। अब दूध नहीं खरीदे जाने से पशुपालकों में आक्रोश है।

गोरखपुर दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (पराग डेयरी) का नया प्लांट फरवरी 2019 में शुरू किया गया था। नए प्लांट की प्रतिदिन दूध खपत क्षमता एक लाख लीटर की है। पुराने प्लांट की दूध खपत क्षमता प्रतिदिन 20 हजार लीटर की थी।
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बताया जा रहा है कि नए प्लांट में बड़ी मशीनों के चलने और 300 समितियों के माध्यम से पर्याप्त दूध नहीं मिलने की वजह से डेयरी का खर्च बढ़ता चला गया, लेकिन आमदनी घट गई। इससे कर्मचारियों और पशुपालकों का डेयरी पर करोड़ों रुपये बकाया हो गया।

कारखाने में उत्पादन बंद होने के बाद पशुपालकों का दूध अयोध्या भेजने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, पशुपालकों का कहना है कि उनका दूध खरीदा नहीं जा रहा है। उनसे कहा जा रहा है कि उनके दूध में पानी अधिक है। यही वजह है कि बुधवार को देवरिया में पशुपालकों ने विरोध प्रदर्शन किया है। डीएम को ज्ञापन भी दिया है।

दुग्ध उत्पादक भविष्य को लेकर चिंतित

गोरखपुर के जानीपुर के प्रदीप उर्फ सोनू पाठक ने बताया कि मेरा परिवार चार दशक से पराग डेयरी को दूध की आपूर्ति कर रहा है। कारखाना बंद हो जाने से भविष्य को लेकर चिंतित हूं। भूपगढ़ गगहा के पशुपालक करुणेश कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि वर्षों से पराग डेयरी को दूध की आपूर्ति कर रहे हैं। डेयरी बंद होने से परेशान हूं। दूध का मेरा 55 हजार रुपये बकाया है। मेरे 25 लीटर दूध को मानक के विपरीत बताकर 20 जून को फेंक दिया गया था।

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डेयरी के चेयरमैन डाॅ. रणजीत सिंह डेयरी को बंद करना किसानों के साथ अन्याय है। मैं दुग्ध संघ संचालक मंडल का चेयरमैन हूं, लेकिन डेयरी बंद करने के विषय में संचालक मंडल से कोई चर्चा नहीं की गई, जो न्यायसंगत नहीं है।

पीसीडीएफ प्रबंध निदेशक, कुणाल सिल्कू ने कहा कि मामला जीएम और चेयरमैन के स्तर का है। उन्होंने ने ही निर्णय लिया है। वैसे डेयरी वर्षों से घाटे में चल रही थी, जिसे बंद कर दिया गया है। डेयरी पर करोड़ों रुपये का बकाया है। पशुपालकों से दूध लेकर अयोध्या भेजा जा रहा है। वहां से तैयार उत्पाद लाकर बेचा जा रहा है।
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डेयरी के कर्मचारी
दुग्ध संघ -22
पीसीडीएफ -1
संविदा पर मिनी सिक्योरिटी -40

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डेयरी पर बकाया राशि
मिनी सिक्योरिटी का 50 लाख
कर्मचारियों का डेढ़ करोड़
स्टीम कंपनी का 15 लाख
ट्रांसपोर्टरों का 60 लाख
स्टेट मिल्क एसएमजी का डेढ़ करोड़
दुग्ध उत्पादकों का दो करोड़ रुपये
कुल बकाया करीब 6.25 करोड़




 
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