पडरौना (कुशीनगर)। होली में खोवा की मांग को देखते हुए मिलावटखोर सक्रिय हैं, जो शुद्धता की आड़ में नकली खोवा बेचने की तैयारी में हैं। 21 फरवरी को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की तरफ से हाटा में रोडवेज की बस से बरामद ढाई क्विंटल खोवा की खेप ने बिचौलियों की मंशा को उजागर भी कर दिया है। ऐसे में नकली या मिलावटी खोवा सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए खोवा खरीदते समय पूरी सावधानी बतरने की आवश्यकता है।
होली और दीपावली में खोवा की खपत को देखते हुए व्यवसायी ज्यादातर कानपुर, लखनऊ और गोरखपुर से खोवा मंगाते हैं। इसी तरह नकली व मिलावटी खोवा भी बड़े शहरों से मंगाया जाता है। असली खोवा जैसा दिखने वाले मिलावटी व नकली खोवा को भी व्यापारी शुद्धता की कीमत में बेच देते हैं। पडरौना नगर के कुछ मिष्ठान व्यवसायी बताते हैं कि असली खोवा खुद भट्ठी पर दूध जलाकर तैयार किया जाता है। शुद्ध खोवा 400 से 500 रुपये प्रति किलोग्राम बेचा जाता है, लेकिन जरुरत के हिसाब से शुद्ध खोवा तैयार नहीं हो पाता है।
कैसे करें खोवा में मिलावट की पहचान
होली में खोवा की डिमांड हर घर में होती है। इसलिए मिलावटखोर सबसे अधिक खोवा में ही मिलावट करते हैं। खोवा में मिलावट परखने का सबसे आसान घरेलू उपाय है। मेडिकल स्टोर से आयोडीन टिंचर खरीद लें। आयोडीन टिंचर की कुछ बूंदें खोवा पर डालें। अगर खोवा का रंग काला या बैंगनी हो जाए तो उसमें स्टार्च (आलू या शकरकंद) की मिलावट होगी।
क्या कहते हैं डॉक्टर
संयुक्त जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार कहते हैं कि मिलावटी या नकली खोवा सबसे पहले हमारे लीवर को प्रभावित करता है। ऐसे खोवे से बनी मिठाइयों का सेवन करने से पेट खराब हो सकता है। पाचन क्रिया प्रभावित होती है।
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