पडरौना। भैयादूज के अवसर पर चित्रांश (कायस्थ) समाज के लोगों ने न केवल कलम-दवात की पूजा की, बल्कि अपने आराध्य भगवान चित्रगुप्त के समक्ष भी पूरी शिद्दत से नमन किया। विधिवत पूजा-पाठ के बाद इन लोगों ने सहभोज किया।
नगर के चित्रगुप्त मंदिर में पडरौना नगर और आस-पास के गांवों में निवास करने वाले चित्रांश समाज के लोग हर साल भैयादूज के दिन एकत्र होते हैं और पूरी शिद्दत से उनकी पूजा करते हैं। इस दिन कलम-दवात की पूजा भी की जाती है।
इस बार भी चित्रांश परिवार के लोगों ने अपने घरों में भगवान चित्रगुप्त के चित्र के सामने बैठकर पूजा-अर्चन किया। उसके बाद पडरौना नगर के रामकोला रोड स्थित चित्रगुप्त मंदिर पहुंचे। यहां मंदिर के पीठाधीश्वर अजयदास की देख रेख में कायस्थ समाज के लोगों ने भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा के सामने बैठकर मंत्रोच्चारण के साथ कलम दवात की विधिवत पूजा-अर्चना की।
मंदिर के पीठाधीश्वर अजय दास ने कहा कि संपूर्ण मानव समाज के भविष्य निर्धारक एवं कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले ईष्टदेव भगवान चित्रगुप्त की महिमा अपार है। पूजा-पाठ के बाद सहभोज का आयोजन हुआ, जिसमें सभी लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
परंपरागत पूजा-अर्चन के बाद चित्रांश समाज के लोगों ने सामूहिक हवन कर पूर्णाहुति दी। इस दौरान जगतानंद श्रीवास्तव, नरेंद वर्मा, संजय चाणक्य, संतोष श्रीवास्तव, शैलेश श्रीवास्तव, धीरेन्द मोहन, विष्णु श्रीवास्तव, सतीश श्रीवास्तव, विंध्यवासिनी श्रीवास्तव, आशुतोष ऋषि, प्रकाश श्रीवास्तव, अतुल श्रीवास्तव, प्रमोद श्रीवास्तव, राजन श्रीवास्तव, हेमंत लाल, रवि, ब्रजेश, बबलू, सतीश लाल समेत तमाम कायस्थ समुदाय के साथ साथ अन्य विरादरी के लोग मौजूद रहे।
तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार सेवरही कस्बा सहित क्षेत्र के राजपुर, तिनफेड़िया, श्यामपट्टी, अवदानटोला, सलेमगढ़, आजादनगर, इंदिरानगर सहित अन्य गांवों में भी भगवान चित्रगुप्त के वंशजों ने उनकी पूजा की। इस दौरान राजेंद्रलाल श्रीवास्तव, अरुण श्रीवास्तव, भोला श्रीवास्तव, नितेंद्र श्रीवास्तव, सुरेशलाल श्रीवास्तव, अनुज श्रीवास्तव, संयोग श्रीवास्तव, मनेंद्र श्रीवास्तव, ह्रदयानंद श्रीवास्तव, देवा श्रीवास्तव सहित अनेंक लोग मौजूद थे।