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Kushinagar News: मवन नाले में छोड़ दिए 3600 बत्तख, हड़कंप

Tue, 03 Jun 2025 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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मवन नाले में छोड़े गए बत्तख। स्रोत-सोशल मीडिया
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कुशीनगर/मथौली। जिले के मथौली-हाटा मार्ग पर हरपुर बरवा के पास मवन नाले में रविवार की रात बत्तखों को छोड़े जाने के बाद हड़कंप मच गया। चंदौली का रहने वाला बत्तख पालक बिहार के मोतिहारी से तीन पिकअप से करीब 3600 बत्तख लेकर यहां पहुंचा और इन्हें नाले में छोड़ दिया। यह सूचना मिलते ही प्रशासन सतर्क हो गया। सीडीओ के निर्देश पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी टीम के साथ सोमवार को सुबह मौके पर पहुंचे। इसके बाद 20 बत्तखों के खून का नमूना लेकर जांच के लिए क्षेत्रीय लैब गोरखपुर भेजा। उन्होंने बत्तक पालक को बुलाकर और उससे पूछताछ भी की। उसे बत्तखों को लेकर जिले से बाहर जाने का निर्देश दिया। शाम को बत्तखों को लेकर जाने के बाद जिम्मेदारों ने राहत की सांस ली।
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गोरखपुर में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद डीएम के निर्देश पर पशु पालन विभाग ने गोरखपुर से आने वाले मुर्गा पर रोक लगा दिया है। इसके अलावा सभी तहसीलों में एक-एक सर्विलांस टीम को सक्रिय किया गया है। यह टीमें गैर जनपदों से आने वाले मुर्गा पर रोक लगाएंगी। इन तैयारियों के बीच रविवार की रात को मवन नाला में तीन पिकअप से करीब 3600 बत्तख लाकर पांच लोगों ने छोड़ दिया। इसकी जानकारी पशु पालन विभाग को देर रात तक नहीं हुई। सुबह किसी ने सीडीओ गुंजन द्विवेदी को यह जानकारी दी। उनके निर्देश पर पशु पालन विभाग की चार टीमें मौके पर पहुंचीं। जांच में पता चला कि इंडिया रनर प्रजाति के लगभग 3600 बत्तख हैं। बत्तख पालन करने वाले चंदौली जिले के मडवार गांव रामपुरकल तहसील चकिया निवासी 30 वर्षीय राहुल ने पूछताछ में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार को बताया कि करीब 15 वर्षों से बत्तख पालन और इसे चराने का काम कर रहा हूं। बिहार के मोतिहारी से बत्तख चराकर कुशीनगर के हरपुर बरवा के पास बहने वाले मवन नाला में हम लोगों ने बत्तखों को छोड़ा। इन बत्तखों को पिकअप से लादकर लाए। बर्ड फ्लू के बारे में हमें जानकारी नहीं है। दूसरी ओर रात में अचानक मवन नाले में बत्तखों को देखकर क्षेत्र के लोगों में खलबली मच गई। जिले में बत्तखों की इंट्री के बाद पशु पालन विभाग के जिम्मेदारों पर सवाल उठने लगे कि आखिर निगरानी के लिए बनी सर्विलांस टीमें क्या कर रही थीं। पशु पालन विभाग की टीम ने बत्तख के साथ मौजूद छह लोगों से करीब चार घंटे तक अलग-अलग पूछताछ की। इन बत्तखों के गोरखपुर से आने की पुष्टि नहीं हुई। पूछताछ में पता चला कि माेतिहारी से गोपालगंज के रास्ते बत्तखों को लाया गया है। तमकुहीराज, कसया, हाटा होते हुए मवन नाले तक यह लोग पहुंचे। इस मौके पर पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ. विनय कुमार सिंह, पशुधन प्रसार अधिकारी विवेक कुमार आदि मौजूद रहे।
अब जांच रिपोर्ट आने का इंतजार
पशु पालन विभाग के डॉक्टरों से पूछताछ में राहुल ने बताया कि बत्तखों के लिए पानी की जरूरत होती है। गर्मी के मौसम में तालाब सूख जाते हैं, इसलिए इन्हें पानी वाले स्थान पर लाकर चरने के लिए छोड़ा जाता है। दो लोग पहले से घूमकर पानी वाले स्थान का सर्वे करते हैं। इसके बाद बत्तखों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाया जाता है। बत्तखों के साथ मौजूद छह लोगों का आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और फोटो टीम ने अपने मोबाइल फोन में कैद किया है। अब सैंपल की जांच रिपोर्ट आने का सभी इंतजार है।
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अंतरराज्यीय सीमा की निगरानी कर रही सर्विलांस टीम

पशु चिकित्सा विभाग को ओर से तैयारी की गई है। पोल्ट्री एवं प्रवासी पक्षियों का गहनतापूर्वक सर्विलांस किया जाएगा। इसके लिए बैकयार्ड पोल्ट्री, पोल्ट्री फाॅर्म, पोल्ट्री दुकान, बाजार व प्रवासी पक्षियों के मार्ग, वन्य जीव अभ्यारण्य, जलाशय, अंतरराज्यीय सीमा से लगे क्षेत्रों को लगातार सर्विंलास पर रखकर कार्य किया जा रहा। पशुपालन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा कुक्कुट पालकों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। जिससे कि पक्षियों में किसी भी असामयिक बीमारी एवं मृत्यु की दशा में तत्काल सूचना, विभाग को मिल सके। जहां अधिक कुक्कुट इकाईयां है, वहां पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पशुपालन विभाग के अधिकारी वन विभाग के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार ने कहा कि जांच में पता चला कि गोरखपुर से नहीं मोतिहारी जिले से बत्तख की खेप लेकर बत्तख पालक आए थे। इनका नाम, पता और आधार कार्ड कब्जे में लिया गया है। 20 बत्तखों का सैंपल लिया गया है। जांच के लिए मंडल कार्यालय लैब में नमूना भेजा गया है। बत्तख पालकों को तत्काल प्रभाव से जिला छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। जिस स्थान पर बत्तख छोड़े गए थे, उस क्षेत्र के आसपास के गांव वाले बर्ड फ्लू को लेकर भयभीत थे। सभी को समझाया गया है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद कुछ कहा जा सकता है।
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