हाटा। सोमवार को हाटा स्वास्थ्य केंद्र में पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यकम में एक ऐतिहासिक दिन याद किया जाएगा। इससे पूर्व टीबी की एक-एक दिन छोड़कर दवा खाने का डोज बंद कर दिया गया है। अब मरीज को प्रतिदिन खाने वाली दवा दी जाएगी। न केवल दवाइयों की संख्या भी कम हो जाएगी, बल्कि प्राइवेट एवं सरकारी इलाज में अंतर भी समाप्त होगा। मरीजों को इस दवा के सेवन में सुविधा होगी और बच्चों के लिए भी फ्लेवर्ड दवाइयां उपलब्ध होंगी, जो पानी में घुलनशील होती हैं।
सोमवार को हाटा के टीबी यूनिट पर दवा की इस नई व्यवस्था की शुरुआत की गई। इस नई व्यवस्था के पहले दिन डिप्टी डीटीओ डॉ. बीपी नरसरिया ने इस दिन दो महिलाओं को यह दवा दी। पहले यह व्यवस्था थी कि टीबी के संभावित रोगी का बलगम अथवा एक्सरे टेस्ट कराया जाता था, जिसमें ट्यूबरक्यूलोसिस के वैक्टीरिया पाए जाने पर मरीज का कार्ड बनाने के साथ ही एक किट दिया जाता था।
इस किट में छह महीने की दवा होती थी। इस किट में दो तरह की दवाएं होती थीं। पहली दवा दो महीने की होती थीं, जिसे सप्ताह में एक दिन के अंतराल पर खाना होता था। उस दवा का कोर्स समाप्त होने पर दवा की एक ही पत्ते में सात दिन की दवा दी जाती थी, जिसे मरीज को बताए गए नियमों के अनुसार सेवन करना होता था। अब नई दवा का सेवन प्रतिदिन करना है। यह दवा पहले से अधिक कारगर है।
सोमवार को टीबी क्लीनिक पर टीबी रोग नियंत्रण प्रभारी डॉ. अजय सिंह, वरिष्ठ टीबी रोग पर्यवेक्षक आशुतोष मिश्र, डॉ. एलबी यादव, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. प्रशांत मिश्र, एसटीएस राजीव राय, विजयकृष्ण द्विवेदी, लालसाहब सिंह, श्रीप्रकाश मिश्र, उपेंद्र शुक्ल, तेजप्रताप सिंह सहित मौजूद थे।