कुशीनगर। न्याय की उम्मीद में अफसरों की दहलीज पर भूखे-प्यासे रहकर अनशन करने वाले फरियादियों की पीड़ा सुनने की बजाय उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। यह स्थिति जनपद मुख्यालय ही नहीं, तहसील स्तर पर भी है। जिंदा होते हुए भी एक वृद्ध को मृत बताकर उसके पट्टीदारों ने जमीन अपने नाम करा ली है। इन व्यक्तियों के खिलाफ पांच दिन से कलेक्ट्रेट के बाहर अनशन कर रहे बुजुर्ग की हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है, लेकिन अफसरों के पास फरियादी की सुध लेने की फुरसत नहीं है। दूसरी ओर खड्डा तहसील में तीन दिन से अनशन कर रही एक महिला को न्याय दिलाने की बजाय अस्पताल भेज दिया गया है।
परसौनी गांव निवासी नगवा ने बताया कि दो साल पहले पट्टीदारों ने सरकारी अभिलेख में उन्हें मृत बताकर उनकी जमीन अपने नाम करा ली। इसकी जानकारी होने पर कई बार तहसील में अर्जी दी, तीन बार मुख्यमंत्री को पत्र भेजा, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। अपने हक के लिए पांच दिन से कलेक्ट्रेट के बाहर अनशन कर रहे हैं, लेकिन कोई सक्षम अधिकारी फरियाद सुनने नहीं आया। अलबत्ता उनकी आवाज दबाने के लिए एक दिन जबरदस्ती उन्हें अस्पताल भेज दिया गया, लेकिन वह तत्काल वापस आकर फिर अनशन पर बैठ गए थे। दिन ब दिन उनकी हालत बिगड़ती जा रही है, लेकिन फरियाद नहीं सुनी जा रही।
उधर, पांच मांगों को लेकर खड्डा तहसील परिसर में अनशन कर रही हथिया गांव की मीरा कुशवाहा की फरियाद सुनने की बजाय अफसरों ने तीसरे दिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया। मीरा अपनी पुश्तैनी जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और अधिकारियों को कई बार पत्र भेज चुकी हैं। अनशन के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को डीएम के प्रतिनिधि के रूप में एओ भरत लाल ने अनशन समाप्त कराने का प्रयास किया था, लेकिन वार्ता विफल हो गई थी। अनशन के तीसरे दिन शुक्रवार को मीरा की हालत बिगड़ गई। पीएचसी के डॉ.एपी राय ने महिला का स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसके बाद एसडीएम जयचंद्र पांडेय ने मीरा को तुर्कहां सीएचसी में भर्ती कराया। अनशन कर रही महिला का कहना है कि उसका अनशन जारी है।