गन्ना बाहुल्य रहे कुशीनगर जनपद में गन्ने और चीनी की उत्पादकता निरंतर कम हो रही है। इसके निदान के लिए अगेती और उन्नतिशील प्रजाति के बीजों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए जिले में 25 ‘गन्ना गांव’ बनाए जाएंगे।
ये गांव चिह्नित कर लिए गए हैं, जहां के किसान 600 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की औसत उपज को पीछे छोड़ औसतन एक हजार क्विंटल प्रति हेक्टेयर गन्ना का उत्पादन कर रहे हैं। गन्ना विभाग इन गांवों के किसानों को पोषक तत्व, कृषि यंत्र, दवाएं, बीज, उर्वरक समितियों की तरफ से उपलब्ध कराने के साथ ही अपनी निगहबानी में उन्हें स्वस्थ व अधिक उपज देने वाले गन्ना बीज मुहैया कराने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।
जिले में यह प्रयोग पहली बार होने जा रहा है। गन्ना पर्यवेक्षकों की देख-रेख में इसी सत्र से किसानों को बीज उपलब्ध कराने के साथ ही जल्द बुवाई भी शुरू करा दी जाएगी।दरअसल, पिछले साल गन्ना उत्पादन में 10 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। जनपद में स्थित दो गन्ना शोध संस्थानों सेवरही के गेंदा सिंह शोध संस्थान और लक्ष्मीपुर के गन्ना अनुसंधान केंद्र में भी बीज उपलब्ध नहीं है, इससे किसान बीज के लिए परेशान रहते हैं। इस कमी को दूर करने और किसानों से सीधा संपर्क बनाने के लिए इस वर्ष की शुरूआत में सर्वे शुरू कराया गया।
सर्वे में पाया गया कि पांचों चीनी मिलों के परिक्षेत्र में कुछ गांव ऐसे हैं, जहां के किसान औसत उत्पादन से कहीं अधिक गन्ना उत्पादन कर रहे हैं। ऐसे गांवों को रोल मॉडल बनाकर वहां उन्नतिशील बीज उत्पादन के लिए गन्ना विभाग की विशेष देख-रेख में पोषक तत्व, कृषि यंत्र, दवाएं, बीज, उर्वरक आदि समितियों की तरफ से उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। इसकी मॉनीटिरिंग करने के साथ ही संबंधित किसानों की लिस्ट भी बनाई जाएगी। गन्ना पर्यवेक्षक अपनी देख रेख में बीज कटवाएंगे और बुवाई भी कराएंगे।
डीसीओ खुशीराम ने बताया कि किसानों को अच्छा बीज मिलेगा तो अच्छा उत्पादन होगा। जिले में गन्ने का क्षेत्रफल निरंतर घट रहा है। पिछले साल 10 प्रतिशत कम उत्पादन हुआ था। ‘गन्ना गांव’ में बीज का उत्पादन करने वाले किसानों को उन्नतिशील, अगेती प्रजाति, रोगरहित और स्वस्थ बीज उपलब्ध कराने के लिए समितियों के माध्यम से सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके जरिए इस साल पांच प्रतिशत और अगले साल 10 प्रतिशत उत्पादन बढ़ाया जाना है। यहां की उत्पादकता का औसत 600 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जिसे बढ़ाकर 700 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखने का लक्ष्य रखा गया है।
जनपद की सभी पांच चीनी मिलों के परिक्षेत्र में चिह्नित हैं ये पांच-पांच गांव
खड्डा चीनी मिल : चरगहां, करदह तिवारी टोला, भुजौली खास, मठिया बुजुर्ग, लखवा बाजार टोला।
कप्तानगंज चीनी मिल : मुड़िला हरपुर, मिश्रौली, नान्हू मुंडेरा, सतभरिया, बरवाखास।
हाटा चीनी मिल : तितला, सेमरी महेशपुर, अनिरुद्धवा, पिपराझाम, खैरा बलुआ।
सेवरही चीनी मिल : धर्मपुर पर्वत, जवहीं दयाल, चौबेया पटखौली, दशहवां, पड़री विशुनदयाल।
रामकोला चीनी मिल : पिपरा खुर्द, भुजौली सोमाली, बकनहां, रामपुर भाठ दिउलिहा, सेखुई।