तमाम कोशिशों के बावजूद जिले में इंसेफेलाइटिस रोग नियंत्रण से बाहर दिख रहा है। अभी बरसात शुरू हुए एक महीने ही हुए हैं, लेकिन जनवरी से अब तक इसकी चपेट में आने वाले मरीजों की संख्या 81 तक पहुंच गई है, जिनमें बेहतर इलाज के अभाव में 22 मासूमों ने दम तोड़ दिया। सीएचसी-पीएचसी स्तर पर बने ईटीसी रेफरल बनकर रह गए हैं, जबकि वहां से जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती होने वाले 49 मरीजों में अब तक केवल की एक की मौत हुई है। ये सभी मरीज जनपद के विभिन्न हिस्सों से आए थे। हालांकि इस जानलेवा बीमारी पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण से लगायत जागरुकता अभियान तक चलाया है।
इंसेफेलाइटिस के प्रभाव को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे रोगियों की पहचान कर उनके रहन-सहन और वातावरण आदि के बारे में एक तरफ जहां सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल की टीमें समय-समय पर आकर अध्ययन कर रही हैं, वहीं ब्लॉक स्तर की सीएचसी-पीएचसी पर अलग से इंसेफेलाइटिस ट्रिटमेंट सेंटर (ईटीसी) बनाए गए हैं, जहां प्रशिक्षित डॉक्टरों और अन्य स्टॉफ की देख रेख में ऐसे मरीजों का इलाज किया जाना है। इसके लिए अलग से वार्ड, बेड और दवाइयों का इंतजाम किया गया है, लेकिन ज्यादातर मामलों में मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज करने की बजाय जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। जिले के विभिन्न हिस्सों से जिला अस्पताल में भर्ती कराए जा रहे मरीज इसकी बानगी हैं। समय पर इलाज शुरू न हो पाना इस बीमारी के बढने की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है।
जिला अस्पताल में बढ़ रही मरीजों की तादाद
जिला अस्पताल में बने इंसेफेलाइटिस के आईसीयू में ऐसे मरीजों के इलाज के लिए एक और डॉक्टर प्रियांक की तैनाती भी कर दी गई है। कुल मिलाकर आईसीयू में अब एनएचएम के तहत सात डॉक्टर और 20 स्टॉफ नर्स हो गई हैं, जो निर्धारित शेड्यूल में अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। बेहतर चिकित्सीय सुविधा का प्रभाव यह है कि जनवरी से अब तक भर्ती कराए गए 49 मरीजों में ज्यादातर स्वस्थ होकर गए, केवल एक मरीज की मौत हुई। गंभीर हालत में लाए गए सात मरीज बृहस्पतिवार को भी आईसीयू में भर्ती थे। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत में सुधार हो रहा था।
जिले में इंसेफेलाइटिस रोगियों की स्थिति
वर्ष पीड़ित मरीजों की संख्या मौत
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2011 1089 133
2012 902 125
2013 773 160
2014 779 147
2015 618 145
2016 81 22 अब तक
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इंसेफेलाइटिस से खतरा, नहीं दिख रहा बचाव का प्रयास
0 आबादी के बीच में अब भी सुअरबाड़े कायम। रोडवेज परिसर सहित पूरे नगर में घूमते हैं सुअर।
0 मच्छरों के खात्मे के लिए न फांगिंग हुई न छिडक़ाव।
0 इंडिया मार्क टू हैंडपंप मानक के अनुरूप नहीं लगाए जाते। खराब होने पर समय से मरम्मत नहीं होते।
0 जलजनित बीमारी से निपटने के लिए शुद्ध पेयजल का इंतजाम नहीं।
0 गंभीर मरीज कर दिए जाते हैं रेफर।
0 टीकाकरण व जागरुकता के लिए गांवों में नहीं होता विशेष प्रयास।
क्या कहते हैं सीएमओ
सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार का कहना है कि इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर जागरुकता की भी जरुरत है। बृहस्पतिवार को जिले भर में तीन हजार से अधिक जागरुकता रैलियां निकाली गईं। इसके अलावा अब गांवों में चौपाल लगाकर लोगों को इंसेफेलाइटिस के प्रति जागरुक किया जाएगा। सभी ईटीसी पर चिकित्सकीय स्टॉफ और संसाधन उपलब्ध हैं।
इंसेफेलाइटिस के सात नए मरीज भर्ती
संयुक्त जिला चिकित्सालय में इंसेफेलाइटिस के आईसीयू में बृहस्पतिवार को सात मरीज भर्ती कराए गए थे। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था।
आईसीयू में विशुनपुरा थाना क्षेत्र के बैरिया गांव के 10 वर्षीय रिजवान, तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के मठिया गांव की पांच वर्षीय अमृता, हनुमानगंज थाना क्षेत्र के तिनबदरहां गांव की 10 वर्षीय संध्या, मिश्रौली की दो वर्षीय रिशा और पटहेरिया के चार वर्षीय अरबाज अली का इलाज चल रहा था। आईसीयू में रामकोला थाना क्षेत्र के रामबर गांव की डेढ़ वर्ष की सुहानी, पडरौना कोतवाली क्षेत्र के गायघाट के चार वर्षीय सुग्रीव और विशुनपुरा थाना क्षेत्र के घूरपट्टी गांव के डेढ़ वर्षीय गिन्नी का इलाज चल रहा था।
जिले की सीएचसी-पीएचसी में संचालित हो रहीं ईटीसी का हाल....
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तमकुहीराज में बनाए गए ईटीसी में औसतन छह से आठ मरीज हर माह पंजीकृत होते हैं। 25 मई से अब तक 12 मरीज ही भर्ती कराए गए हैं। बृहस्पतिवार को यह ईटीसी बंद था। उनमें दो को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। सेवरही सीएचसी के ईटीसी में 17 मरीज भर्ती हुए, उनमें दो रेफर किए गए। केंद्र प्रभारी डॉ. राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि चार बेड का एक वार्ड बनाया गया है, जहां पूरी सुविधा उपलब्ध है।
खाली पड़ा था ईटीसी
सीएचसी हाटा की ईटीसी में अप्रैल से अब तक 26 मरीज भर्ती कराए गए। बृहस्पतिवार को वार्ड खाली था। इस वार्ड के लिए अलग से कोई नियुक्ति नहीं हुई है।
अब तक केवल दो मरीज भर्ती हुए
जटहां बाजार। विशुनपुरा सीएचसी में बने ईटीसी में सभी संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन अब तक केवल दो मरीज ही भर्ती कराए गए हैं। छह बेड के इस वार्ड में ऑक्सीजन, जरुरी दवाएं और अन्य संसाधन उपलब्ध हैं। सीएचसी विशुनपुरा के प्रभारी डॉक्टर संतोष ने सभी संसाधन उपलब्ध होने की बात कही।
दो माह में 20 मरीज भर्ती
रामकोला। इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए रामकोला की सीएचसी में बने ईटीसी में दो माह में कुल 20 मरीज भर्ती कराए गए, जिनमें एक को रेफर किया गया। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रजनीश श्रीवास्तव आने वाले सभी मरीजों का उपचार किए जाने की बात कही।