खड्डा (कुशीनगर)। रविवार की रात में अचानक पांच लाख क्यूसेक से अधिक पानी डिस्चार्ज होने के चलते खड्डा के रेता क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति विकट हो गई है। प्रभावित एक दर्जन गांवों में चार से पांच फुट तक पानी लगा है। पिछले 48 घंटे से भूखे-प्यासे लोग छोटी नाव के सहारे बाढ़ से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे हैं। महराजगंज के सोहगीबरवा और बिहार के वाल्मीकि नगर ब्याघ्र परियोजना क्षेत्र में पानी भरने के बाद तमाम जंगली जीव भी बाढ़ के साथ बह गए हैं। छितौनी, कटाई भरपुरवा और एपी तटबंध पर रेनकट के चलते स्थिति और गंभीर हो गई है। डीएम-एसपी ने सोमवार को छितौनी बांध समेत बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने का निर्देश दिया।
बीते शुक्रवार से ही गंडक नदी का डिस्चार्ज धीरे-धीरे बढ़ रहा था। रविवार को सुबह से बहाव तेज होने लगा। रात 10 बजे वाल्मीकि नगर बैराज से 5.17 लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया। बीते 15 वर्ष का यह सर्वाधिक जलस्तर था। इसके चलते नदी किनारे बसे खड्डा रेता क्षेत्र के गांवों में हड़कंप मच गया। गंडक नदी का जलस्तर भैसहा गेज स्थल पर सोमवार की सुबह आठ बजे खतरे के निशान से 51 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया था। मरचहवा दक्षिण टोला, पूरब टोला, बसंतपुर, शिवपुर, सालिकपुर, महदेवा, नरायनपुर, विंध्याचलपुर, बालगोविंद छपरा आदि गांवों में बाढ़ का पानी भर गया। मरचहवा और बसंतपुर गांव के घरों में चार से पांच फिट तक पानी लगा है। लोग बच्चों को लेकर किसी तरह से छप्पर के उपर शरण लिए हैं। अनाज, कपड़ा, बर्तन बाढ़ में बह गया। कई घरों में बंधी बकरियां भी बाढ़ में समा गईं। सोमवार की सुबह से लोग छोटी नाव से जान जोखिम में डालकर तीन किलोमीटर दूर सोहगीबरवा की ओर निकल रहे हैं। शिवपुर गांव में लोग भी इधर-उधर शरण ले रहे हैं। शाहपुर, विंध्याचलपुर, सालिकपुर व महदेवा गांव का रास्ता कट जाने की वजह से लोग परेशान हैं। वीरभार ठोकर के पास छितौनी बांध में खतरनाक गड्ढा बन गया है। लक्ष्मीपुर पड़रहवा गांव के लोगों ने खतरा बढ़ता देख खुद ही रेनकट को भरने का कार्य शुरू किया। डीएम आंद्रा वामसी व एसपी यमुना प्रसाद ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित इलाके का निरीक्षण किया और मातहतों को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया। सोमवार को दोपहर बाद नदी का जलस्तर कम होने लगा था। दोपहर दो बजे डिस्चार्ज 3.47 लाख क्यूसेक हो गया था।
साइफन का फाटक टूटने से फसलें जलमग्न
जटहां बाजार।
गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी का असर कटाई भरपुरवा बंधे पर भी पड़ने लगा है। कटाई भरपुरवा गांव के मंसाछापर टोला के पास एक जगह बंधा धंसने लगा था, जिसे मिट्टी डालकर बराकर किया गया। इसी गांव के पास बंधे पर बने साइफन का फाटक टूट गया है। इसके चलते 200 एकड़ से ज्यादे फसल डूब गई है। साइफन के रास्ते तेजी से निकल रहा नदी का पानी जटहां-नेबुआ मार्ग पर बह रहा है। कई घरों में भी पानी घुस गया है। किसान सरतेज मिश्र, डॉक्टर नंदलाल मिश्र, संजीव, बीडीसी सदस्य सबलू आदि का कहना है कि भरटोली, मदरहवा, कचहरी, सरया, गुरजहवा टोला आदि के किनारे तक पानी पहुंच गया है। प्रशासन ने कराई नाव की व्यवस्था
तमकुहीरोड/दुदही।
गंडक नदी का डिस्चार्ज बढ़ने के बाद तमकुही क्षेत्र में भी हालात भयावह हो गए हैं। पिपराघाट के सभी 17 टोलों में बाढ़ का पानी भर गया है। बांसी नदी के गोलाघाट पर लगे पीपा पुल को खोला जा रहा है। बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने 20 नाव का इंतजाम किया है। इसके अलावा अमवा तटबंध पर भी पानी का दबाव बढ़ गया है। खैरटिया पूर्वी टोला और पश्चिमी टोला में पानी भर गया है। बरवापट्टी के सामने साइफन से तेजी से पानी निकल रहा है। खैरटिया-बिचपटवा मार्ग पर पानी बहने लगा है।