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दो लाख की गड़बड़ी की जांच में खुली 32 लाख की धांधली

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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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पडरौना (कुशीनगर)। कलेक्ट्रेट के प्राधिकारी अधिकारी (ओसी) बिल के फर्जी हस्ताक्षर से करीब 33 लाख रुपये निकाले जाने के मामले में दो लाख रुपये की गड़बड़ी की शुरू हुई जांच करोड़ों रुपये की धांधली तक पहुंच गई है। इस मामले में पुलिस ने जिसे मुख्य आरोपी मानकर जेल भेजा है वह कलेक्ट्रेट के आपदा विभाग में प्राइवेट मुंशी के तौर पर काम करता था। उसके खिलाफ शुरू हुई जांच की जद में अन्य विभागों के लिपिक भी आ गए हैं।
एसबीआई पडरौना की मुख्य शाखा की ओर से 33 लाख रुपये का बैंकर्स चेक ओसी बिल के नाम काटा गया था। 20 अगस्त को प्राइवेट मुंशी सुबोध मिश्र ने प्राधिकारी अधिकारी बिल की तरफ से बैंक को फर्जी पत्र जारी कर उस राशि को रमापति मिश्र, प्रद्युम्न विश्वकर्मा तथा कलेक्ट्रेट के ओसी बिल के नाम से काटने को कहा था। पत्र मिलने के बाद बैंक ने तीनों के नाम चेक जारी कर दिया। पडरौना के कोतवाल विजय राज सिंह बताया कि इस मामले में पहली बार दो लाख रुपये की गड़बड़ी मिली थी। इस मामले में सुबोध मिश्र सहित आठ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चार को जेल भेजा गया था। उन्होंने बताया कि दूसरी बार 10 लाख और अब तक करीब 32 लाख रुपये फर्जी तरीके से निकाल लिए जाने की बात सामने आ चुकी है। कोतवाल के अनुसार धांधली में जेल भेजे गए चार लोगों के साथ ही आपदा, कोषागार और बैंक से जुड़े अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। मामले की जांच अभी जारी है।
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जांच अधिकारी एडीएम कृष्ण लाल तिवारी ने बताया कि कलेक्ट्रेट से जुड़े तीन लिपिकों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि जिला उद्यान अधिकारी के कार्यालय से आपदा में संबद्घ लिपिक को निलंबित करने के लिए डिप्टी डायरेक्टर उद्यान को संस्तुति की गई है। आलमारी में पड़े लैप्स हो चुके करोड़ों रुपये के 126 चेक के लाभार्थियों का पता नहीं मिला है। यह संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही है। लाभार्थियों का पता लगाने के लिए उनके साथ जांच टीम में तहसीलदार भी शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों का पता चल जाने पर उनके नाम से पुन: चेक जारी करा दिया जाएगा। उन्होंने माना कि दो लाख रुपये की छोटी गड़बड़ी की जांच से बहुत बड़ा खुलासा हो रहा है। डीएम डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि जांच में पता चला कि भुगतान के लिए जो पत्र बैंक को लिखा गया था, उसकी शैली मुंशी और लिपिक के लिखावट जैसी है। उन्होंने बताया कि बंधन बैंक में भुगतान के लिए दिए गए चेक पर सहायक शाखा प्रबंधक की तरफ से आपत्ति जताए जाने के बाद मामला खुला।
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