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स्कूलों की तालाबंदी से एक लाख बच्चों का भविष्य दांव पर

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पडरौना (कुशीनगर)। सरकारी स्कूलों की बदहाली के चलते अपने नौनिहालों को कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाने वाले तमाम लोगों के सामने अजीब सा गंभीर संकट खड़ा हो गया है। संकट यह है कि इनके बच्चों का नाम गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में है और दुदही हादसे के बाद इन स्कूलों को बंद करने का आदेश हो चुका है। नए सत्र में नामांकन के बाद ये लोग बच्चों की किताब, कॉपी, ड्रेस, फीस आदि पर मोटी रकम खर्च कर चुके हैं। अब नए स्कूल में नामांकन के लिए दुबारा रुपयों का प्रबंध करना होगा, अन्यथा फिर बच्चों को उसी सरकरी स्कूल में पढ़ाना होगा, जहां से बचने के लिए वे कान्वेंट स्कूल में नामांकन कराने गए थे।
कुशीनगर जिले में लगभग पांच लाख बच्चे छह से 14 आयु वर्ग के हैं। इनमें से करीब तीन लाख बच्चे परिषदीय स्कूलों में पढ़ते हैं। शेष दो लाख बच्चे कान्वेंट स्कूलों में हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के रिकार्ड के अनुसार जिले में 2179 प्राथमिक, 824 जूनियर हाईस्कूल बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित हैं। इसके अलावा 1003 विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त हैं। हादसे के तत्काल बाद शुरू हुई जांच के लिए विभाग ने बिना मान्यता के चलने वाले प्राइवेट स्कूलों की सूची इकट्ठा की तो 427 विद्यालय बिना मान्यता के संचालित होते चिन्हित किया गया था। इसके अलावा शुरू हुई जांच में भी 100 से अधिक विद्यालय बिना मान्यता के पाए गए हैं। इस तरह बिना मान्यता के संचालित होने वाले स्कूलों की संख्या करीब छह सौ हो गई है। विभागीय अफसरों का अनुमान है कि बिना मान्यता के चल रहे इन स्कूलों में करीब एक लाख बच्चों का नामांकन है।
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जांच शुरू होते ही विद्यालय बंद, अभिभावक परेशान
हादसे के बाद शासन के निर्देश पर एसडीएम व अन्य अफसरों की टीम लगातार स्कूलों की जांच कर रही है। जांच व कार्रवाई के भय से अधिकांश स्कूल बंद हो गए हैं। मंसाछापर क्षेत्र के रामनिवास, विजेंद्र, महेश आदि का कहना है कि अप्रैल महीने में नए सत्र की शुरूआत में उन लोगों ने अपने बच्चों के एडमिशन के लिए फीस, कॉपी-किताब समेत अन्य सामानों के लिए पांच हजार रुपये खर्च किए थे। परंतु अब स्कूल बंद है। पता लगा है कि जिस स्कूल में उनके बच्चे का नामांकन था, उसकी मान्यता नहीं है। अब बच्चों का नामांकन दूसरे स्कूल में होगा। अब जिस प्राइवेट स्कूल में नामांकन होगा वहां के लिए फिर सभी सामान खरीदना होगा। फीस भी जमा करनी पड़ेगी। इतना रुपया खर्च नहीं कर पाए तो बच्चे को गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाना पड़ेगा। सरकारी स्कूल की हालत पहले से ही खराब थी, इसीलिए प्राइवेट स्कूल में नाम लिखाया था।
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क्या कहते हैं अफसर
पडरौना व सुकरौली ब्लाक के खंड शिक्षाधिकारी सत्यप्रकाश कुशवाहा का कहना है कि अभिभावकों को भी यह पता करना चाहिए कि जिस स्कूल में बच्चे को पढ़ाने जा रहे हैं उसकी मान्यता है या नहीं, जो अध्यापक वहां पढ़ा रहे हैं उनकी योग्यता क्या है। सरकारी स्कूलों में बहुत सभी योग्य अध्यापक ही कार्यरत हैं। लोग अपने बच्चों का नामांकन कराएं, किताब-ड्रेस की सुविधा भी सरकार देगी। बिना मान्यता के संचालित होने वाले सभी स्कूलों को अनिवार्य रूप से बंद कराया जाएगा।
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