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कोऑपरेटिव बैंक की नौ इकाइयां बड़ी शाखाओं में मर्ज
- लेन देन करने वालों में सर्वाधिक खाताधारक इन्हीं शाखाओं के
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। जनपद में स्थित कोऑपरेटिव बैंक की नौ शाखाएं इस वर्ष बंद हो गईं। इन शाखाओं में पडरौना शहर में संचालित होने वाली सांध्यकालीन शाखा भी थी। अब जब इस बैंक की शाखाओं के दुर्दिन दूर होने को हैं तो यहां खाताधारकों की चहल पहल बढ़ने लगी हैं। इन बैंकों में आने वाले ज्यादातर खाताधारक मर्ज हुई इन नौ शाखाओं के हैं।
डेढ़ दशक पहले तक कोऑपरेटिव बैंकों की स्थिति काफी ठीक थी। किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान से लेकर, वेतन, पेंशन आदि की रकम भी इन बैंकों में जमा होती थी। तब यहां कर्मचारियों की संख्या भी ठीक थी। अकेले पडरौना के कोऑपरेटिव बैंक की मुख्य शाखा में छह कर्मचारी होते थे लेकिन वर्ष 2004 में गन्ना मूल्य का भुगतान इन बैंकों में भेजे जाने पर रोक लग जाने से स्थिति दयनीय होती गई और एक वर्ष बाद ही कोऑपरेटिव बैंक की शाखाओं में लेन देन बंद हो गए। बैंक के कर्मचारियों को वेतन समय से मिलना मुश्किल हो गया। इधर, बैंक की शाखाओं पर खर्च घटाने की गरज से सरकार ने जिले की नौ इकाइयों को बड़ी शाखाओं में मर्ज करने का निर्णय ले लिया। उसके बाद इसे अमल में लाते हुए मौजूदा वर्ष में फरवरी से मार्च के बीच इन नौ शाखाओं को मर्ज कर दिया गया। कोऑपरेटिव बैंक देवरिया के महाप्रबंधक उपेंद्र कुमार शास्वत ने कहा कि इससे खाताधारकों के लेन-देन में कोई समस्या नहीं है। जिस शाखा से उनका खाता संबद्घ किया गया है, वहां जाकर लेन-देन कर सकते हैं।
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कोऑपरेटिव बैंक की ये नौ शाखाएं मर्ज हुईं...
मर्ज होने वाली शाखाओं में अहिरौली राजा, तुर्कपट्टी, तरयासुजान, अहिरौली बाजार, बोदरवार, लक्ष्मीगंज, पिपरा बाजार, कठकुइयां और पडरौना नगर की सांध्यकालीन शाखा शामिल है। चूंकि अब सभी बैंक में शाम चार बजे तक लेन-देन चलता है, इसलिए इस सांध्यकालीन शाखा का औचित्य नहीं रह गया।
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